
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती में हुए दुखद प्लेन हादसे में मौत ने पूरे राज्य को शोक में डुबो दिया है। एनसीपी और उनके समर्थक इस हादसे से स्तब्ध हैं, वहीं महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है।
अजित पवार ने अपने 9 साल 305 दिनों के राजनीतिक जीवन में बारामती से गहरा नाता जोड़ा। उन्होंने बारामती से लगातार नौ बार जीत दर्ज की और अपनी लोकप्रियता से पश्चिम महाराष्ट्र में एनसीपी की मजबूत पकड़ बनाई। हालांकि, उनका जन्म अहमदनगर जिले के देवलाली में हुआ था और उनका ननिहाल प्रवरा, राहुरी में था। मां आशा पवार भी अहिल्यानगर की रहने वाली थीं।
2026 के महानगरपालिका चुनावों में एनसीपी पुणे और पिंपरी चिंचवड जैसे गढ़ में कमजोर प्रदर्शन कर रही थी, लेकिन अहिल्यानगर महानगरपालिका से अजित पवार को ‘गुड न्यूज’ मिली। यहाँ 17 वार्ड की 68 सीटों के चुनाव में एनसीपी ने 27 सीटें जीतकर अकेले बहुमत हासिल किया, जबकि बीजेपी को 25 सीटें मिलीं। शिंदे की शिवसेना को 10, बीएसपी को 1, उद्धव ठाकरे की पार्टी को 1 और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं।
अजित पवार की मौत उनके समर्थकों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। बारामती और अहिल्यानगर के बीच उनका अटूट रिश्ता रहा, जिसने उन्हें हमेशा गहरे जनसमर्थन और लोकप्रियता से नवाज़ा। बारामती और आसपास के क्षेत्र उनके लिए सिर्फ राजनीतिक गढ़ नहीं, बल्कि उनका दूसरा घर थे।
अजित पवार की अंतिम यात्रा और उनके योगदान को महाराष्ट्र हमेशा याद रखेगा।