
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ न्यूरो सर्जरी कर तीन साल की बच्ची की जान बचा ली। बच्ची के दिमाग में फंसी गोली लगातार अपनी जगह बदल रही थी, जिससे उसकी जान को गंभीर खतरा बना हुआ था। डॉक्टरों ने अत्याधुनिक तकनीक की मदद से गोली को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। फिलहाल बच्ची खतरे से बाहर है और तेजी से स्वस्थ हो रही है।
न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. अंकुर बजाज ने बताया कि 16 दिसंबर 2025 की शाम करीब चार बजे बच्ची के सिर के बाएं हिस्से (फ्रंटल बोन) में गोली लगी थी। घायल होने के लगभग साढ़े चार घंटे बाद कराए गए सीटी स्कैन में गोली दिमाग के ऊपरी हिस्से में पाई गई थी। हालांकि, अगले दिन केजीएमयू में दोबारा जांच करने पर सामने आया कि गोली खिसककर दिमाग के गहरे हिस्से यानी बेसल एरिया तक पहुंच चुकी है।
लगातार बदलती रही गोली की स्थिति
डॉ. बजाज के अनुसार, यह स्थिति बेहद खतरनाक थी, क्योंकि गोली के खिसकने से दिमाग की महत्वपूर्ण नसों और रक्त वाहिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था। इसी कारण सीटी एंजियोग्राफी कराई गई, लेकिन करीब 25 घंटे बाद हुई जांच में यह सामने आया कि गोली फिर अपनी जगह बदलकर दिमाग के पिछले हिस्से, यानी ऑक्सिपिटल एरिया में पहुंच चुकी है। इससे स्पष्ट हो गया कि यह एक दुर्लभ ‘वॉन्डरिंग बुलेट’ का मामला है।
रियल टाइम तकनीक से हुई सर्जरी
सर्जरी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती गोली की लगातार बदलती लोकेशन थी। डॉक्टरों ने इंट्राऑपरेटिव फ्लोरोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल कर रियल टाइम में गोली की स्थिति पर नजर रखी और न्यूनतम नुकसान के साथ उसे सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।
आईसीयू में भर्ती, हालत में सुधार
सर्जरी के बाद बच्ची को पीडियाट्रिक आईसीयू में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची पहले से अधिक सजग है और उसकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है।
इन डॉक्टरों की टीम ने निभाई अहम भूमिका
यह जटिल सर्जरी डॉ. अंकुर बजाज ने अपनी टीम में शामिल डॉ. अनूप के. सिंह, डॉ. अंकन बसु और डॉ. श्रद्धा के साथ, विभागाध्यक्ष प्रो. बी.के. ओझा के मार्गदर्शन में की। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. मोनिका कोहली और डॉ. नीलकमल ने संभाली।
केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने इस उल्लेखनीय सफलता पर पूरी चिकित्सा टीम को बधाई दी है।