
इंदौर: कहते हैं कि जेल केवल सजा काटने की जगह नहीं, बल्कि जीवन बदलने का पाठ भी पढ़ाती है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर इंदौर सेंट्रल जेल से 9 कैदियों को रिहा किया गया, जिनमें सबसे चर्चित नाम है शंकर का। साल 2012 में हत्या के आरोप में सलाखों के पीछे गया यह शख्स, 15 साल बाद बाहर निकलते समय साधु शंकर गिरी बनकर समाज के सामने आया।
सेंट्रल जेल से रिहाई के समय कैदियों के हाथों में तिरंगा और श्रीफल थमाए गए। जेल अधीक्षक अलका सोनकर ने सभी रिहा हो रहे कैदियों को विदा किया। जेल प्रशासन ने पहले ही उनके परिजनों को रिहाई की सूचना दे दी थी।
हत्यारा शंकर से साधु शंकर गिरी तक
15 साल पहले जब शंकर जेल में आया था, तब वह हत्या के मामले में दोषी था। लेकिन जेल के अंदर उसने भजन, ध्यान और ईश्वर की आराधना को अपना जीवन बना लिया। भगवा वस्त्र पहनकर, हाथ में तिरंगा लिए और साधु के रूप में बाहर आने वाले शंकर गिरी का कहना है कि वह अब साधु जीवन ही जीएगा।
जेल में भक्ति और अनुशासन का जीवन
सेंट्रल जेल अधीक्षक अलका सोनकर ने बताया कि गणतंत्र दिवस के मौके पर सजा पूरी कर चुके इन नौ कैदियों को शासन की ओर से माफी दी गई। जेल में उनके अच्छे आचरण, अनुशासन और सहयोग को देखकर यह निर्णय लिया गया। विशेष रूप से शंकर गिरी ने जेल में रहते हुए भक्ति, साधना और ध्यान में अपनी पूरी ऊर्जा लगा दी।
नई शुरुआत का प्रतीक
शंकर गिरी की कहानी यह संदेश देती है कि जेल की सलाखें भी जीवन बदल सकती हैं, यदि व्यक्ति के अंदर बदलाव की चाह और ईश्वर की भक्ति हो। आज वह साधु बनकर समाज के बीच कदम रखता है, और अपनी नई जीवन यात्रा की शुरुआत करता है।