
नई दिल्ली: भारत ने गाजा शांति योजना पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ प्रस्ताव में शामिल होने से पहले सभी स्टेकहोल्डर्स के विचार जानने का निर्णय लिया है। ट्रंप के इस प्लान में कई अरब और मुस्लिम देशों ने हिस्सा लिया है, लेकिन भारत अपने फैसले से पहले अरब देशों की राय भी सुनना चाहता है।
भारत की रणनीति
31 जनवरी को दिल्ली में अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हो रही है, जहां भारत ट्रंप के प्रस्ताव पर उनके विचार जानने के लिए चर्चा करेगा।
सऊदी अरब, मोरक्को, मिस्र, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ट्रंप के बोर्ड में शामिल हैं।
भारत और UAE ने हाल ही में व्यापार और रक्षा क्षेत्र में बड़ी डील की है, जिससे यह क्षेत्रीय सहयोग और मजबूत हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्राएँ
रिपोर्ट के अनुसार, बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी फरवरी में इजरायल और किसी अरब देश की यात्रा पर जा सकते हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी पीएम मोदी को दौरे का निमंत्रण दिया है।
इन यात्राओं में ट्रंप के गाजा प्रस्ताव पर बातचीत एक अहम एजेंडा हो सकता है।
ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस और भारत की सतर्कता
ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में वैश्विक नेताओं को बोर्ड ऑफ पीस चार्टर पर हस्ताक्षर के लिए बुलाया, जिसमें कुछ अरब और मुस्लिम देशों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
भारत ने जल्दीबाजी से बचते हुए, किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले सभी संबंधित देशों और हितधारकों से राय लेना जरूरी समझा।
भारत का मानना है कि ट्रंप की योजना संयुक्त राष्ट्र के समानांतर एक अंतरराष्ट्रीय संगठन बना सकती है, इसलिए इसकी रणनीति और प्रभाव का अनुमान लगाने में सतर्कता जरूरी है।