Tuesday, May 26

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छत्तीसगढ़ फैक्ट्री विस्फोट में गया के छह मजदूरों की मौत, गोतिबंध गांव में पसरा मातम हादसे से बाल-बाल बचे राजेश बोले— अगर लौटता नहीं, तो मैं भी उनमें शामिल होता

गया।
छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले में स्थित एक स्पंज आयरन प्लांट में कोयला भट्टी फटने से बिहार के गया जिले के छह मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के पैतृक गांव डुमरिया प्रखंड के गोतिबंध गांव में कोहराम मच गया है। हर घर में शोक की लहर है और गांव गमगीन माहौल में डूबा हुआ है।

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जानकारी के अनुसार, गुरुवार को हुए इस भीषण विस्फोट में रोजी-रोटी की तलाश में छत्तीसगढ़ गए छह मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। सभी मजदूर करीब 15 दिन पहले ही काम के सिलसिले में छत्तीसगढ़ गए थे।

हादसे में जान गंवाने वालों में श्रवण कुमार (22), जितेंद्र भुइयां (37), बद्री भुइयां (42), विनय भुइयां (40) तथा सुंदर भुइयां (40) और उनके पुत्र राजदेव भारती (22) शामिल हैं। पिता-पुत्र की एक साथ मौत से गांव में शोक और भी गहरा हो गया है।

गांव के राजेश ठाकुर इस हादसे में बाल-बाल बच गए। उन्होंने बताया कि एक ठेकेदार करीब 25 मजदूरों को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के नेपानिया गांव ले गया था। राजेश किसी निजी कारण से 18 जनवरी को घर लौट आए थे। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, अगर मैं लौटकर नहीं आता, तो आज मैं भी उन्हीं पीड़ितों में शामिल होता।

परिजनों ने बताया कि मृतक विनय भुइयां चार बेटियों और एक बेटे के पिता थे, जबकि जितेंद्र की बेटी महज चार महीने की है। श्रवण कुमार के पिता शंकर भारती ने बताया कि बेटा अभी 15 दिन पहले ही काम पर गया था और अचानक उसकी मौत की खबर आ गई। विनय की पत्नी सरिता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।

इस हृदयविदारक घटना पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से दोदो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।

वहीं केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने भी पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि घटना की जांच कराई जाएगी और मृतकों के शवों को उनके पैतृक गांव गयाजी लाने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके।

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और कार्यस्थलों पर लापरवाही के मुद्दे को गंभीर सवालों के घेरे में ला दिया है।

 

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