
नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने लंबे समय बाद पहली बार बांग्लादेश के मौजूदा राजनीतिक हालात और अल्पसंख्यकों की दुर्दशा पर खुलकर बात की। नवभारत टाइम्स से खास बातचीत में उन्होंने चुनाव, द्विपक्षीय संबंधों और राजनीतिक उत्पीड़न पर अपनी चिंता व्यक्त की।
तारिक रहमान की वापसी पर शेख हसीना का बयान
शेख हसीना ने कहा कि BNP अध्यक्ष बने तारिक रहमान लंबे समय तक लंदन में निर्वासित रहे और आम लोगों की समस्याओं से दूर रहे। उन्होंने अपनी माँ और पूर्व पीएम खालिदा जिया के कथित भ्रष्टाचार में भूमिका निभाई। BNP ने अपने शॉर्ट टर्म हितों के लिए कट्टरपंथियों से करीबी दिखाई, जिससे लोकतांत्रिक विकल्पों का नुकसान हुआ।
फरवरी चुनाव की संभावनाएं
शेख हसीना ने चुनाव को केवल नाम के चुनाव करार दिया। उनका कहना है कि मौजूदा सरकार ने अवामी लीग को चुनाव में हिस्सा लेने से वंचित किया है। अगर अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने दिया जाए तो देश के आधे से ज्यादा वोटर उनके पक्ष में होंगे।
अल्पसंख्यकों पर हमलों पर टिप्पणी
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार अल्पसंख्यकों पर हिंसा को रोकने में नाकाम रही और इसे सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया। कट्टरपंथी तत्व अब शक्तिशाली हैं और उनके हाथ में अपराधियों और आतंकी संगठनों से संबंध रखने वाले लोग हैं। यह माहौल तुष्टिकरण की नीति का परिणाम है।
भारत की भूमिका
शेख हसीना ने भारत सरकार के समर्थन की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवाधिकार हनन और राजनीतिक उत्पीड़न की घटनाओं की आलोचना की है। उनका मानना है कि भारत-बांग्लादेश के संबंध आपसी सहयोग और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं।
बच्चों को राजनीति में लाने पर दृष्टिकोण
शेख हसीना ने कहा कि अवामी लीग किसी एक परिवार की पार्टी नहीं है। यह लाखों बांग्लादेशियों की पार्टी है जो लोकतंत्र, आजादी और सहिष्णुता में विश्वास रखते हैं। उनका दल समाज के सभी वर्गों के लिए काम करता रहा है और भविष्य में भी इसी दिशा में काम करेगा।
द्विपक्षीय संबंधों का भविष्य
उन्होंने चेताया कि यूनुस प्रशासन की नीतियों और अल्पसंख्यकों के प्रति उदासीन रवैये के कारण भारत-बांग्लादेश संबंधों में खटास बढ़ सकती है। शेख हसीना ने भारतीय मिशनों पर हमलों और धमकियों का हवाला देते हुए कहा कि बांग्लादेश में स्थिर और लोकतांत्रिक सरकार की आवश्यकता है।
सार्वजनिक संबोधन
बांग्लादेश छोड़ने के बाद शेख हसीना ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर यूनुस सरकार पर कड़ा हमला किया। उन्होंने कहा कि वहां निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकते और महिलाओं तथा अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न हो रहा है। उन्होंने यूएन से जांच कराने की भी मांग की।