Saturday, January 24

ब्रिटिश काल के साहित्य को हटाकर राष्ट्रपति भवन में खुला ‘ग्रंथ कुटीर’, पौराणिक और शास्त्रीय भारत की 2300 कृतियों का संग्रह

 

This slideshow requires JavaScript.

 

 

 

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में ‘ग्रंथ कुटीर’ का उद्घाटन किया। इस पहल के तहत ब्रिटिश काल के साहित्य को हटाकर भारत की 11 शास्त्रीय भाषाओं की करीब 2,300 ग्रंथों और पांडुलिपियों का संग्रह स्थापित किया गया। यह कदम भारत की सभ्यतागत और साहित्यिक विरासत को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयास का हिस्सा है।

 

 

 

11 शास्त्रीय भाषाओं में समृद्ध साहित्य

 

राष्ट्रपति भवन के बयान के अनुसार इस संग्रह में तमिल, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओडिया, मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला भाषाओं की रचनाएं शामिल हैं। इसमें महाकाव्य, दर्शन, भाषा विज्ञान, इतिहास, शासन, विज्ञान और भक्ति साहित्य जैसे विषयों की पांडुलिपियां और पुस्तकें हैं। लगभग 50 पांडुलिपियां ताड़ के पत्ते, कागज, छाल और कपड़े जैसी पारंपरिक सामग्रियों पर हस्तलिखित हैं।

 

 

 

ब्रिटिश साहित्य का स्थानांतरण और डिजिटाइजेशन

 

पहले राष्ट्रपति भवन में विलियम होगार्थ, लॉर्ड कर्ज़न ऑफ केडलस्टन और उनके प्रशासन संबंधी पुस्तकें रखी जाती थीं। अब इन्हें अलग स्थान पर संग्रहित किया गया है और शोधकर्ताओं के लिए ऑनलाइन डिजिटाइज्ड कर दिया गया है।

 

राष्ट्रपति भवन ने कहा कि ‘ग्रंथ कुटीर’ का उद्देश्य औपनिवेशिक प्रभावों से मुक्ति और भारत की सांस्कृतिक, दार्शनिक एवं साहित्यिक विरासत को बढ़ावा देना है। यह पहल ज्ञान भारतम मिशन के समर्थन में भी की गई है, जिसका लक्ष्य परंपरा और तकनीक को मिलाकर भारत की विशाल हस्तलिखित विरासत का संरक्षण और प्रसारण करना है।

 

 

 

राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन

 

राष्ट्रपति ने कहा कि शास्त्रीय भाषाओं ने भारतीय संस्कृति की नींव रखी है। तिरुक्कुरल और अर्थशास्त्र आज भी प्रासंगिक हैं। पाणिनी का व्याकरण, आर्यभट्ट का गणित और चरक-सुश्रुत का चिकित्सा विज्ञान आज भी दुनिया को प्रेरित करते हैं।

 

राष्ट्रपति ने युवाओं को कम से कम एक शास्त्रीय भाषा सीखने, विश्वविद्यालयों में शिक्षण को बढ़ावा देने और पुस्तकालयों में इस तरह की कृतियों को उपलब्ध कराने का आह्वान किया।

 

 

 

शास्त्रीय भाषाओं का दर्जा

 

2024 में केंद्र सरकार ने मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया, जिससे देश में शास्त्रीय भाषाओं की कुल संख्या 11 हो गई। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) पांडुलिपियों के संरक्षण, प्रलेखन और प्रदर्शन के लिए पेशेवर सहयोग प्रदान कर रहा है।

 

Leave a Reply