Thursday, January 22

अमेरिका-चीन छूट जाएंगे पीछे, भारत बनेगा दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी: अमेरिकी दिग्गज का दावा

नई दिल्ली: दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी मजबूती दिखा रही है। अमेरिका के Carlyle Group के सह-संस्थापक डेविड रुबेनस्टीन ने दावा किया है कि भारत अगले दो-तीन दशकों में चीन और अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है और दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी बन सकता है।

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रुबेनस्टीन ने यह बात स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे World Economic Forum में ईटी के साथ विशेष बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि 20-30 साल में भारत दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी बन सकता है।” उन्होंने अमेरिका और भारत के रिश्तों पर भी भरोसा जताया और कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप आम तौर पर भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक रहे हैं।

नीतियों का महत्व
रुबेनस्टीन ने भारतीय नीति निर्माताओं से आग्रह किया कि वे वैश्विक प्राइवेट क्रेडिट और प्राइवेट इक्विटी (PE) को पश्चिमी देशों जैसा निवेश समझने की बजाय इसे भारत में नवाचार और विकास के अवसर के रूप में अपनाएं। उन्होंने कहा कि जब प्राइवेट क्रेडिट और PE के बाजार को स्वतंत्र रूप से फलने-फूलने दिया जाएगा, तो पूंजी वाले भारतीय उद्यमी भी इसमें सक्रिय होंगे।

रुबेनस्टीन ने समझाया कि प्राइवेट इक्विटी का मतलब है कंपनियों का पैसा उन व्यवसायों में लगाना जो अभी शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं हैं। वहीं प्राइवेट क्रेडिट में कंपनियां सीधे कर्ज देती हैं, बैंकिंग चैनल के बिना। Carlyle Group ने भारत में विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों में 8 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है।

चीन और अमेरिका के संबंध
रुबेनस्टीन ने कहा कि ट्रंप की चीन नीति का उद्देश्य चीन को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि व्यापार असंतुलन को सही करना था। चीन ने अमेरिकी चुनौतियों के चलते दूसरे बाजारों में अपने उत्पाद बेचना शुरू किए और इसका सालाना सरप्लस एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया।

उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप के लिए चीन उतना बड़ा मुद्दा नहीं है जितना कि रूस-यूक्रेन का मामला। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनके संबंध अच्छे हैं और इस साल वे कम से कम दो बार मिल सकते हैं, संभवतः कोई समझौता भी होगा।

भारत का भविष्य
रुबेनस्टीन का यह बयान भारत के तेज आर्थिक विकास और वैश्विक निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। उनका मानना है कि यदि सही नीतियां अपनाई जाएं तो भारत आने वाले दशकों में न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक ताकत बन सकता है।

 

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