
नई दिल्ली: भारतीय रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया। बुधवार सुबह 91.05 पर खुलने के बाद रुपये ने कारोबार के दौरान 91.74 का स्तर छू लिया और अंततः 91.65 पर बंद हुआ। यह 21 नवंबर के बाद रुपये में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है।
आरबीआई का आधिकारिक रेफरेंस रेट USD/INR 91.5500 था, जबकि रुपये का बाजार बंद भाव इससे ऊपर रहा। जानकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक के पास स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, लेकिन फिलहाल वैश्विक अनिश्चितता रुपये पर दबाव बना रही है। दिसंबर 2025 में रुपये का सबसे निचला स्तर 91.14 था।
रुपये पर दबाव की वजह
कोटक महिंद्रा एएमसी के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) अभिषेक बिसेन ने बताया कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अस्थिर पूंजी प्रवाह के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी मुद्रा बाजार पर असर डाल रहा है। इसके प्रमुख कारणों में ग्रीनलैंड विवाद और वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण शामिल हैं।
बिसेन के अनुसार, अमेरिका-यूरोप संबंधों में खटास और नाटो की संभावित अस्थिरता ने निवेशकों में असुरक्षा बढ़ा दी है। वहीं, भारत के लिए अमेरिका के साथ लंबित व्यापार समझौता एक महत्वपूर्ण स्थिरता कारक है। इस समझौते के निष्कर्ष से विश्वास बहाल होगा और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
शेयर बाजार पर असर
मौद्रिक कमजोरी का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखा। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 270.84 अंक गिरकर 81,909.63 पर जबकि एनएसई का निफ्टी 75 अंक फिसलकर 25,157.50 पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिकी डॉलर की मजबूती रुपये पर दबाव बनाए रखेगी, लेकिन रिजर्व बैंक के पास इसे नियंत्रित करने के पर्याप्त साधन मौजूद हैं।