
नई दिल्ली: भारत ने 2030 तक अपने टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात को दोगुना कर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके तहत सरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वाले देशों पर विशेष फोकस करेगी और हाई-वैल्यू सेगमेंट जैसे भौगोलिक संकेत (GI) वाले उत्पाद, कालीन, हैंडलूम और रेशमी वस्त्रों का निर्यात बढ़ाएगी।
टेक्सटाइल मंत्रालय के अनुसार, योजना का उद्देश्य भारत की निर्यात हिस्सेदारी को वर्तमान 5.8% से बढ़ाकर लगभग 12% तक ले जाना है। इसके साथ ही, हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स की ब्रांडिंग को भी मजबूत किया जाएगा। इस रणनीति के तहत नए जिलों और नए निर्यातकों को शामिल करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से बांग्लादेश की चिंता बढ़ सकती है। टेक्सटाइल बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का ‘बैकबोन’ है और उसकी जीडीपी में इसका योगदान 80% से अधिक है। बांग्लादेश जल्द ही LDC दर्जे से बाहर होगा, जिससे उसे मिलने वाली टैक्स छूट खत्म हो जाएगी। वहीं भारत के लिए यह अवसर बांग्लादेश के बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का बड़ा मौका है।
सरकारी सूत्रों ने कहा, “हमें ऐसे उत्पादों में निर्यात क्षमता बढ़ाने की जरूरत है, जिनमें सांस्कृतिक मूल्य और रोजगार सृजन की क्षमता हो। राज्यों से कहा गया है कि वे नए निर्यातकों को विकसित करें और पहली बार निर्यात करने वालों की मदद करें।”
विश्लेषकों का कहना है कि यदि भारत अपनी लॉजिस्टिक्स लागत कम कर बड़े पैमाने पर FTA साइन करता है और कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करता है, तो वैश्विक बाजार में भारत बांग्लादेश की स्थिति को चुनौती दे सकता है।