
इंदौर: भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैल रहे उल्टी-दस्त प्रकोप ने एक और जीवन ले लिया। 50 वर्षीय ई-रिक्शा चालक हेमंत गायकवाड़ की निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मंगलवार रात मौत हो गई। इससे स्थानीय लोगों के अनुसार इस प्रकोप में अब तक कुल 25 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सरकारी आंकड़ों में इस संख्या कम बताई गई है।
हेमंत के छोटे भाई संजय गायकवाड़ ने कहा, “मेरे भाई की मौत दूषित पानी के कारण हुई। उन्होंने महज 15 दिन की बीमारी में अपनी जान गंवाई। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और राज्य सरकार को हर संभव मदद करनी चाहिए। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।” हेमंत परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे।
उनकी बेटी रिया ने बताया कि पिता को दस्त की समस्या हुई और उन्हें पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। संजय ने कहा कि भागीरथपुरा के लोग पिछले दो साल से दूषित पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं और नगर निगम से कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अधिकारियों के मुताबिक दिसंबर के अंत से ही भागीरथपुरा में लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला शुरू हुआ। 51 नलकूपों की जांच में पानी में ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया पाया गया। नगर निगम की पाइपलाइन में रिसाव के कारण शौचालय का पानी भी मिला। शहर के महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट के अनुसार कम से कम 15 मौतें इस प्रकोप से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हो सकती हैं।