
पेरिस/नई दिल्ली: भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने की बातचीत एडवांस स्तर पर है, लेकिन इसी बीच फ्रांस को ग्लोबल मार्केट में बड़ा झटका लगा है। फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन की उम्मीद थी कि कोलंबिया से लगभग 29,000 करोड़ रुपये की डील मिल जाएगी। कोलंबिया अपने पुराने इजरायली किफिर जेट विमानों को बदलने के लिए राफेल में दिलचस्पी दिखा रहा था।
हालांकि ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, कोलंबियाई सरकार ने राफेल की बजाय स्वीडन के ग्रिपेन फाइटर जेट को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। स्वीडन ने कोलंबिया को लंबी अवधि के इंडस्ट्रियल सपोर्ट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, लोकल असेंबली की संभावना और ऑपरेशनल व मेंटेनेंस खर्च में कमी का ऑफर दिया था। माना जा रहा है कि इसी वजह से कोलंबिया ने राफेल को ठुकरा दिया।
भारत की स्थिति अलग
भारत ने राफेल जेट के साथ जाने का फैसला किया है। भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट विजयेन्द्र के ठाकुर ने नवभारत टाइम्स से कहा, “भारत के पास राफेल के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर, मेंटिनेंस सेंटर और पूरा इको-सिस्टम तैयार है। भारतीय वायुसेना राफेल के साथ पूरी तरह काम करने के लिए तैयार है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वीडन का ग्रिपेन विमान हल्का, ज्यादा लचीला और ऑपरेट करने में सस्ता है। लेकिन भारत ने राफेल को प्राथमिकता दी क्योंकि इसके लिए पहले से तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक सपोर्ट मौजूद है।
भारत और फ्रांस के बीच डील
भारत और फ्रांस के बीच राफेल डील की संभावित कीमत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिसमें लगभग 30% स्वदेशीकरण शामिल है। यह डील दुनिया के सबसे बड़े मिलिट्री एविएशन कॉन्ट्रैक्ट में से एक मानी जा रही है।
इस बीच कोलंबिया का राफेल से इंकार और स्वीडन के ग्रिपेन को प्राथमिकता देना फ्रांस के लिए ग्लोबल मार्केट में बड़ा झटका साबित हुआ है।