
रोम/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की योजना ने यूरोप के देशों में हलचल मचा दी है। यूरोप के ज्यादातर देश इस कदम का कड़ा विरोध कर रहे हैं, जबकि कुछ देश अमेरिका के साथ तनाव बढ़ाने से बचते नजर आ रहे हैं।
भारत के पूर्व विदेश सचिव और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार कंवल सिब्बल ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के रुख पर सवाल उठाए हैं। सिब्बल का कहना है कि मेलोनी ग्रीनलैंड मुद्दे पर गोलमोल बयान देकर समस्या टालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इससे यूरोप की मुश्किलें कम नहीं होंगी।
सिब्बल ने कहा कि मेलोनी का यह कहना कि ग्रीनलैंड में यूरोपीय नाटो सैनिकों की तैनाती अमेरिका विरोधी नहीं है, अमेरिका को गलतफहमी में डाल सकता है। सिब्बल ने अपने पोस्ट में लिखा, “किसी समस्या से भागने का मतलब यह नहीं कि समस्या दूर चली जाएगी। यूरोप पीछे हटता है और टालमटोल करता है, तो ट्रंप को दूसरे मतभेदों वाले मुद्दों पर उसके खिलाफ टैरिफ हथियार का इस्तेमाल करने का बहाना मिलेगा।”
टैरिफ धमकी से बढ़ा विवाद
डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिका के कब्जे के विरोध पर यूरोप के देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी है। उन्होंने डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूके पर नए टैक्स लगाने की घोषणा की है। ट्रंप ने कहा कि ये देश ग्रीनलैंड पर उनके प्लान का विरोध कर रहे हैं।
सिब्बल ने चेताया है कि यूरोप अगर इस मुद्दे पर साफ और निर्णायक रुख नहीं अपनाता, तो अमेरिका द्वारा ब्लैकमेल और टैरिफ के इस्तेमाल से यूरोप की स्थिति और कमजोर हो सकती है।