
नई दिल्ली: अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के प्रतिबंधों के बीच रूस के तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारत ने रूस से तेल का आयात घटा दिया है, जबकि चीन ने इसका भरपूर लाभ उठाते हुए रूसी यूराल क्रूड (Urals crude) का आयात तीन साल के उच्चतम स्तर पर कर दिया है।
चीन को सस्ता तेल मिल रहा है
व्यापारिक सूत्रों और शिपिंग डेटा के अनुसार, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और भारत द्वारा रूस से तेल की मांग घटने के कारण चीन को यूराल क्रूड अपेक्षाकृत सस्ती कीमत पर मिल रहा है। इस समय चीन हर दिन लगभग 4,05,000 बैरल रूसी यूराल क्रूड समुद्री मार्ग से आयात कर रहा है, जो जून 2023 के बाद का सबसे अधिक आंकड़ा है। कुल मिलाकर चीन रूस से समुद्री मार्ग से लगभग 14 लाख बैरल प्रति दिन तेल आयात कर रहा है।
भारत ने घटाया आयात
केप्लर डेटा के अनुसार, भारत में दिसंबर 2025 में यूराल क्रूड का आयात घटकर 9,29,000 बैरल प्रतिदिन रह गया, जो दिसंबर 2022 के बाद सबसे कम है। साल 2024 में यह औसत 13.6 लाख बैरल प्रतिदिन और साल 2025 में 12.7 लाख बैरल प्रतिदिन था। भारत की सबसे बड़ी तेल खरीदार कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जनवरी 2026 में रूस से तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर दिया।
ईयू प्रतिबंध और तेल उत्पाद पर असर
21 जनवरी से यूरोपीय संघ रूसी मूल के कच्चे तेल से बने ईंधन पर बैन लागू करने जा रहा है। इसके तहत, यूरोप को डीजल और अन्य तेल उत्पाद बेचने वाली भारतीय और तुर्की की रिफाइनरियों को सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्रोडक्ट कम से कम दो महीने तक रूसी कच्चे तेल से न बने हों। इस स्थिति में यूरोप को तेल बेचने वाले देशों ने यूराल क्रूड की खरीद कम कर दी है, जबकि चीन, जो यूरोप को कम निर्यात करता है, इसका लाभ उठा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के तेल उत्पादक पश्चिमी प्रतिबंधों और मांग में बदलाव के चलते एशियाई बाजार में अधिक सक्रिय हो गए हैं। इस बीच, भारत ने नए विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं, ताकि तेल आपूर्ति की स्थिरता बनी रहे।