
हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के प्रस्ताव ने हैदराबाद के मोटर वाहन मालिकों में चिंता और विवाद दोनों खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया है कि ट्रैफिक चालान के जुर्माने सीधे वाहन मालिकों के बैंक खाते से ऑटोमेटिक काटे जा सकते हैं। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया और आम जनता में आलोचना की लहर दौड़ गई है।
लोगों की चिंता:
नागरिक और व्यवसायी इस प्रस्ताव को कानूनी, संवैधानिक और नैतिक दृष्टि से गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे ‘ड्यू प्रोसेस’ यानी सही कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन हो सकता है। वर्तमान व्यवस्था में नागरिकों को चालान समझने, आपत्ति दर्ज कराने, अपील करने और न्याय मांगने का अधिकार है। ऑटो-डेबिट लागू होने पर लोग पहले पैसे कटने और बाद में शिकायत करने जैसी स्थिति का सामना कर सकते हैं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ:
X (पूर्व में ट्विटर) पर कई उपयोगकर्ताओं ने इस योजना पर व्यंग्य और आलोचना की। एक यूजर ने सवाल उठाया, “अगर सड़कें खराब हैं, तो चालान राशि किसके खाते से कटनी चाहिए?” कई लोग सरकारी महकमे की जवाबदेही पर भी सवाल कर रहे हैं, जैसे खराब ट्रैफिक सिग्नल, लंबी यू-टर्न और खराब ट्रैफिक प्लानिंग के कारण अतिरिक्त ईंधन खर्च।
सरकार के संभावित लाभ:
समय पर जुर्माने की वसूली और अनुपालन बढ़ाना।
तेज प्रवर्तन और कम नोटिस/फॉलो-अप की जरूरत।
सड़क सुरक्षा बढ़ाने में योगदान।
कागजी कार्रवाई और मैनपावर में कमी।
नागरिकों के संभावित नुकसान:
गलत चालान पर आपत्ति की सुविधा न होना।
तकनीकी या सिस्टम की गलती से बार-बार पैसे कटना।
वित्तीय समस्याएँ जैसे EMI या किराया भुगतान में दिक्कत।
जवाबदेही और निष्पक्षता की कमी।
बीच का रास्ता संभव:
विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर ऑटो-डेबिट सिस्टम लाना ही है तो इसे सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए:
केवल फाइनल चालान पर ऑटो-डेबिट।
अपील की अवधि के बाद ही पैसे काटे जाएँ।
गलत कटौती होने पर तुरंत रिफंड।
कटौती से पहले और बाद में SMS/ऐप अलर्ट।
आपातकालीन या मेडिकल मामलों में छूट।
हैदराबाद के नागरिकों का कहना है कि यह प्रणाली तभी स्वीकार्य होगी जब उनके अधिकारों और वित्तीय सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए।