
नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। स्वदेशी गाइडेड पिनाका रॉकेट का निर्यात शुरू कर दिया गया है और आर्मेनिया इसका पहला अंतरराष्ट्रीय खरीदार बन गया है। इस ऐतिहासिक खेप को सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस (SDAL) नामक निजी कंपनी ने तैयार किया है।
प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर का सहयोग
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ऐम्युनिशन उत्पादन में ग्लोबल हब बनने की दिशा में अग्रसर है। इसके लिए पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर दोनों की बराबर भूमिका जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हमें सहयोग की भावना से आगे बढ़ना है, प्रतिस्पर्धा से नहीं। दोनों सेक्टर राष्ट्रहित में एक-दूसरे की मजबूती के पूरक बनकर काम करें।”
SDAL की उपलब्धियां
सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस (SDAL), सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड की रक्षा उत्पादन कंपनी है। यह देश में विस्फोटकों और आधुनिक हथियारों की प्रमुख निर्माता बन चुकी है। SDAL ने अब तक नागास्त्र (लोइटरिंग म्यूनिशन), भार्गवास्त्र मिसाइल (काउंटर-ड्रोन सिस्टम), पिनाका रॉकेट, ग्रेनेड और UAVs जैसी अत्याधुनिक डिफेंस प्रणालियां विकसित की हैं। रक्षा मंत्री ने इस कंपनी द्वारा ऑपरेशन सिंदूर में नागास्त्र ड्रोन के सफल प्रयोग की भी सराहना की।
गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम
पिनाका रॉकेट एक स्वदेशी मोबाइल, मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर है, जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है। यह 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है, और इसकी रेंज 40 किलोमीटर से 120 किलोमीटर तक है, जिसे भविष्य में और बढ़ाया जा सकता है। इसका गाइडेड संस्करण सटीक हमलों के लिए सक्षम है। फ्रांस जैसे देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।
भारत में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी
रक्षा मंत्री के अनुसार, निजी क्षेत्र की भागीदारी कम से कम 50% होनी चाहिए। 2014 में यह केवल 46,425 करोड़ रुपये का सेक्टर था, जो अब लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ चुका है। निजी क्षेत्र का योगदान अब 33,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 24,000 करोड़ रुपये हो चुकी है।
भारत की यह पहल न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में देश को एक मजबूत डिफेंस निर्यातक के रूप में स्थापित करेगी।