Saturday, January 17

शीर्षक: F-16 पैकेज के बाद अमेरिका-पाकिस्तान सैन्य सहयोग: आतंकवाद विरोधी ट्रेनिंग पर उठे सवाल

अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ सैन्य संबंधों को फिर से मजबूती देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पाकिस्तानी सेना के जवानों के लिए आतंकवाद विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया है। अमेरिकी सेना और पाकिस्तानी सेना ने एक्सरसाइज इंस्पायर्ड गैम्बिट के तहत पाकिस्तान के नेशनल काउंटर-टेररिज्म सेंटर में संयुक्त प्रशिक्षण किया, जिसमें कंबाइंड इन्फेंट्री स्किल्स, टैक्टिक्स और आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन्स पर विशेष ध्यान दिया गया।

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अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को और मजबूत करना है। वहीं, पाकिस्तान की मीडिया ने इसे सैन्य सहयोग के फिर से शुरू होने के संकेत के रूप में देखा है, जिसमें संयुक्त आतंकवाद विरोधी ट्रेनिंग, बड़े हथियारों की बिक्री और वॉशिंगटन से गर्मजोशी भरे राजनीतिक संदेश शामिल हैं।

यह सैन्य सहयोग ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े को अपग्रेड करने के लिए 686 मिलियन डॉलर का रक्षा पैकेज देने की घोषणा की थी। इस पैकेज की घोषणा भारत द्वारा पिछले साल मई में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाने के बाद की गई थी।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल असीम मुनीर से कई बार मुलाकात की और उनकी प्रशंसा करते हुए उन्हें अपना “पसंदीदा फील्ड मार्शल” बताया। ट्रंप के इस रुख ने उन लोगों के लिए आश्चर्य पैदा किया है, जिन्होंने अफगान युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा पाकिस्तान पर लगाए गए आरोपों को देखा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ आतंकवाद विरोधी सैन्य अभ्यास करना और उसी देश को F-16 अपग्रेड पैकेज देना अमेरिकी नीति में विरोधाभास और पाखंड की तस्वीर पेश करता है। यह कदम अमेरिका की दोहरे मानक वाली नीतियों पर भी सवाल उठाता है।

निष्कर्ष:
अमेरिका का पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग और एफ-16 पैकेज, दुनिया के सामने आतंकवाद विरोधी दावों और वास्तविक नीतियों के बीच असंगति को उजागर करता है।

 

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