
जबलपुर: मध्य प्रदेश में शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में खुलासा हुआ है कि जबलपुर के 6 निजी स्कूलों ने नोडल अधिकारियों से सांठगांठ कर 628 फर्जी दाखिले दिखाए और शासन से लाखों रुपये की फीस प्रतिपूर्ति राशि हड़प ली।
ईओडब्ल्यू ने इस मामले में 6 स्कूल संचालकों और 5 नोडल अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और आपराधिक साजिश सहित गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
2011 से 2016 तक चलता रहा घोटाला
जांच के अनुसार यह घोटाला वर्ष 2011 से 2016 के बीच किया गया। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और गरीबी रेखा से नीचे के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं, जिसके बदले सरकार फीस प्रतिपूर्ति करती है। इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर एक ही छात्र का कई बार दाखिला दिखाया गया।
6 स्कूलों ने किया 26.50 लाख रुपये का गबन
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि जबलपुर के 466 निजी स्कूलों को कुल 3 करोड़ 27 लाख 83 हजार रुपये की फीस प्रतिपूर्ति दी गई थी, लेकिन इनमें से 6 स्कूलों ने 628 फर्जी दाखिलों के जरिए करीब 26 लाख 50 हजार रुपये का गबन किया।
इन स्कूल संचालकों और अधिकारियों पर केस
ईओडब्ल्यू ने स्मिता चिल्ड्रन एकेडमी के संचालक मनीष असाटी व नोडल अधिकारी चंद्र कोष्टा, आदर्श ज्ञान सागर शिक्षा शाला की संचालक नसरीन बेगम व नोडल अधिकारी गुल निगार खान, गुरु पब्लिक स्कूल के मो. तौफिक व नोडल अधिकारी अख्तर बेगम, अस्मानिया मिडिल स्कूल के मो. शमीम व नोडल अधिकारी राजेंद्र बुधौलिया तथा सेंट अब्राहम स्कूल के संचालक मोहम्मद शफीक व नोडल अधिकारी डी.के. मेहता के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है। ईओडब्ल्यू ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा आगे और बढ़ सकता है।