
नई दिल्ली।
अमेरिका की प्रमुख निवेश कंपनी टाइगर ग्लोबल को फ्लिपकार्ट मामले में बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के अगस्त 2024 के फैसले को पलटते हुए कहा कि कंपनी को 2018 में फ्लिपकार्ट से बाहर निकलते समय हुए मुनाफे (कैपिटल गेंस) पर भारत में टैक्स देना होगा।
मामला क्या है?
टाइगर ग्लोबल ने अक्टूबर 2011 से अप्रैल 2015 के बीच फ्लिपकार्ट के सिंगापुर स्थित शेयर खरीदे। बाद में इन शेयरों को लक्जमबर्ग की कंपनी ‘फिट होल्डिंग्स SARL’ को ट्रांसफर कर दिया गया। साल 2018 में जब वालमार्ट ने फ्लिपकार्ट में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी, तब टाइगर ग्लोबल ने इस निवेश से बाहर निकलकर 1.6 बिलियन डॉलर का मुनाफा कमाया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
- जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि जिन शेयरों को बेचकर मुनाफा कमाया गया, उन्हें कानून के खिलाफ जाकर खास व्यवस्था के तहत ट्रांसफर किया गया था।
- इस स्थिति में कंपनी DTAA के आर्टिकल 13(4) के तहत टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकती।
- कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें टाइगर ग्लोबल के पक्ष में टैक्स की मांग को खारिज किया गया था।
विवाद और कारण
- टाइगर ग्लोबल ने टैक्स छूट के लिए मॉरीशस से टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (TRC) दिखाया था।
- इनकम टैक्स विभाग ने कहा कि मॉरीशस में यह कंपनी केवल टैक्स बचाने के लिए मुखौटा थी और इसका असली नियंत्रण अमेरिका स्थित TGM LLC के पास था।
- दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया और TGM LLC को केवल इन्वेस्टमेंट मैनेजर माना, पैरेंट कंपनी नहीं।
- सुप्रीम कोर्ट ने इनकम टैक्स विभाग के पक्ष को सही ठहराया।
क्यों है अहम?
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला टाइगर ग्लोबल के लिए बड़ा झटका है और मॉरीशस या सिंगापुर के रास्ते भारत में निवेश करने वाली अन्य कंपनियों के लिए भी सतर्क करने वाला संकेत है। यह निर्णय भारतीय टैक्स विभाग के लिए महत्वपूर्ण जीत माना जा रहा है।
निष्कर्ष:
अब टाइगर ग्लोबल को फ्लिपकार्ट डील में कमाए गए मुनाफे पर भारत में टैक्स देना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय निवेशक यह समझेंगे कि टैक्स बचाने के लिए मात्र विदेशी कंपनी का नाम इस्तेमाल करना अब काम नहीं आएगा।