
नोएडा। दिल्ली से सटे नोएडा में औद्योगिक विकास और निवेश को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इन्वेस्ट यूपी की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जिले में 400 से अधिक औद्योगिक प्लॉट पर काम नहीं शुरू हुआ है। इस रिपोर्ट के बाद नोएडा अथॉरिटी ने गहन जांच कराई, जिसमें 63 नॉन-फंक्शनल प्लॉट सामने आए।
फर्जी एमओयू का मामला
जांच में यह भी पता चला कि अधिकांश प्लॉट का आवंटन यूपी इन्वेस्टर समिट के दौरान जल्दबाजी में किए गए एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) के आधार पर हुआ था। कई निवेशकों ने केवल जमीन हासिल करने के उद्देश्य से एमओयू किया था, जबकि कोई औद्योगिक काम नहीं शुरू किया।
नोएडा अथॉरिटी ने पहले भी ऐसे निवेशकों को नोटिस जारी किए थे। अब अथॉरिटी इन प्लॉट्स के निरस्तीकरण, जुर्माना और पुनः आवंटन पर विचार कर रही है। नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम ने बताया कि 63 ऐसे औद्योगिक भूखंड मिले हैं, जिन पर कोई काम नहीं हुआ है। हालांकि, कुछ को फंक्शनल होने का समय अभी बचा हुआ है।
13 प्लॉटों का तुरंत निरस्तीकरण
ग्रेटर नोएडा में ऐसे आवंटियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 13 औद्योगिक प्लॉटों का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। इनमें कई आवंटियों को 2008 में प्लॉट मिला था। प्लॉट लेने के बाद भी कोई काम नहीं होने पर अथॉरिटी ने नोटिस जारी किए, लेकिन कार्रवाई न होने पर अंततः प्लॉट का आवंटन निरस्त किया गया। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव ने बताया कि प्लॉट लेकर निर्माण नहीं करने वालों पर कार्रवाई की गई है।