
नई दिल्ली।
दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के माहौल में सोना और चांदी एक बार फिर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इस सप्ताह दोनों कीमती धातुओं ने नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई या मध्य-पूर्व में तनाव और गहराया, तो सोना-चांदी की कीमतों में और तेज़ उछाल देखने को मिल सकता है।
बुधवार को MCX पर सोना 1,43,590 रुपये प्रति 10 ग्राम के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। वहीं चांदी ने 2,91,406 रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया। घरेलू बाजार में भी सोना करीब 0.67 फीसदी की तेजी के साथ 1,43,201 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी में लगभग 5 फीसदी की उछाल दर्ज की गई और यह 2,89,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।
वैश्विक बाजारों में भी चमक बरकरार
भारत ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं की चमक बनी हुई है। भले ही मुनाफावसूली के चलते कुछ सत्रों में हल्की गिरावट दिखी हो, लेकिन रुझान अब भी मजबूत है। स्पॉट गोल्ड ने हाल ही में 4,642.72 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड छूने के बाद 4,594 डॉलर के आसपास कारोबार किया। चांदी भी 93.57 डॉलर प्रति औंस के उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद कुछ नरम पड़ी, लेकिन सिर्फ चार कारोबारी सत्रों में इसमें 20 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई।
2026 में अब तक दमदार रिटर्न
MCX पर 2026 के शुरुआती दो हफ्तों में ही सोने ने 5 फीसदी से अधिक का रिटर्न दे दिया है। पिछले एक साल में इसकी बढ़त करीब 80 फीसदी रही है। चांदी ने तो सोने को भी पीछे छोड़ दिया है—इस साल अब तक 15 फीसदी से अधिक और पिछले एक साल में लगभग 190 फीसदी का जबरदस्त रिटर्न।
तेजी के पीछे क्या हैं कारण
रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, यह तेजी वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता और संस्थागत भरोसे को लेकर बढ़ती चिंताओं का नतीजा है।
उनका कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर सवाल, व्यापारिक जोखिम, वेनेजुएला में अमेरिका की सक्रियता और ईरान में बढ़ती अशांति ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मोड़ दिया है।
ईरान को लेकर सैन्य कार्रवाई की आशंका
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने हाल ही में कहा है कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की संभावना वास्तविक है। ऐसे बयान बाजार में डर और अनिश्चितता को और बढ़ा रहे हैं, जिसका सीधा फायदा सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों को मिल रहा है।
चांदी का भविष्य और उज्ज्वल?
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की दोहरी भूमिका—एक औद्योगिक धातु और एक मौद्रिक संपत्ति—इसे और मजबूत बनाती है। अमेरिका द्वारा इसे ‘आवश्यक खनिज’ घोषित किए जाने और सॉवरेन निवेशकों की बढ़ती रुचि से इसकी मांग और बढ़ी है।
SAMCO सिक्योरिटीज का अनुमान है कि MCX पर चांदी की कीमतें आने वाले समय में 3.94 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकती हैं, बशर्ते वैश्विक हालात तनावपूर्ण बने रहें।
सतर्कता भी जरूरी
हालांकि, सभी विशेषज्ञ पूरी तरह उत्साहित नहीं हैं। मशहूर निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी ने चेतावनी दी है कि चांदी अल्पावधि में अपने शिखर के करीब हो सकती है और तेज़ सट्टेबाजी के चलते इसमें अचानक गिरावट भी आ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति
जानकारों की राय है कि इतनी तेज़ बढ़त के बाद अल्पावधि में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से सोना और चांदी अब भी मजबूत बने हुए हैं। भू-राजनीतिक जोखिम, मौद्रिक अनिश्चितता और वैश्विक अस्थिरता के दौर में ये धातुएं निवेशकों के पोर्टफोलियो को संतुलन और सुरक्षा देने का काम कर सकती हैं।
संक्षेप में, अगर ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ता है, तो सोना-चांदी की कीमतें सचमुच ‘रॉकेट’ बन सकती हैं—लेकिन निवेश से पहले समझदारी और संतुलन बेहद जरूरी है।