
नई दिल्ली।
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Trade Deal) की बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को संकेत दिए कि यह समझौता अंतिम चरण में है और दोनों देशों के पूरी तरह तैयार होते ही इसकी औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।
अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि बातचीत लगभग सभी लंबित मुद्दों पर हो चुकी है और वार्ताकार लगातार संपर्क में हैं। हालांकि, उन्होंने किसी निश्चित तारीख का ऐलान करने से इनकार किया। उनका कहना था कि समझौते की घोषणा तभी होगी, जब दोनों पक्षों को लगेगा कि यही सही समय है।
कुछ समय के लिए धीमी पड़ी थी रफ्तार
पिछले साल सितंबर में अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने के बाद व्यापार वार्ता की गति कुछ समय के लिए धीमी पड़ गई थी। लेकिन दिसंबर के अंतिम सप्ताह में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर के बीच हुई ऑनलाइन बैठक के बाद बातचीत ने फिर से रफ्तार पकड़ी। इससे पहले 10–11 दिसंबर को अमेरिकी उप व्यापार प्रतिनिधि रिक स्विट्जर के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने भारत का दौरा भी किया था।
अमेरिकी राजदूत के संकेत
भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने 12 जनवरी को कहा था कि दोनों देश सक्रिय रूप से समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उन्होंने कहा, “असली मित्रों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अंततः उन्हें सुलझा लिया जाता है।”
सकारात्मक माहौल, उम्मीदें मजबूत
राजेश अग्रवाल ने भरोसा जताया कि यह समझौता अंजाम तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि सभी व्यापार वार्ताओं में भारत सकारात्मक और आशावादी रुख अपनाता है और अमेरिका के साथ संवाद कभी टूटा नहीं।
गौरतलब है कि पिछले साल की शुरुआत में दोनों देशों ने इस व्यापार समझौते पर औपचारिक बातचीत शुरू की थी। कई दौर की वार्ता के बावजूद कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर कुछ मतभेद बने रहे, लेकिन अब इन पर भी सहमति बनने की उम्मीद है।
आर्थिक और रणनीतिक महत्व
यह व्यापार समझौता भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा। इससे दोनों देशों के व्यापारियों और उपभोक्ताओं को लाभ मिलने की संभावना है। अमेरिका भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को और विस्तार देगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस डील में टैरिफ, नॉन-टैरिफ बैरियर, बौद्धिक संपदा अधिकार और सेवाओं के व्यापार जैसे जटिल मुद्दे शामिल हैं, जिन पर सहमति बनना आसान नहीं होता। इसके बावजूद मौजूदा संकेत बताते हैं कि दोनों देश समाधान की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।
वैश्विक असर भी अहम
भारत सरकार इस समझौते को निर्यात बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने की रणनीति का अहम हिस्सा मान रही है। वहीं, अमेरिका के साथ मजबूत व्यापारिक साझेदारी का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, भारत–अमेरिका व्यापार समझौता न केवल आर्थिक, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाहें इसी पर टिकी हैं कि दोनों देश कब इस बहुप्रतीक्षित समझौते का औपचारिक ऐलान करते हैं।
