
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों के चलते गुरुवार को शेयर बाजार में पूरे दिन की छुट्टी रही। इस ट्रेडिंग हॉलिडे को लेकर जेरोधा के सीईओ नितिन कामत की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बाजार जगत में बहस छेड़ दी। कामत ने सवाल उठाया कि एक स्थानीय निकाय चुनाव के लिए शेयर बाजार बंद करना आखिर कितना तर्कसंगत है।
दरअसल, पहले 15 जनवरी को केवल सेटलमेंट हॉलिडे माना जा रहा था, लेकिन पिछले सप्ताह एक्सचेंजों ने संशोधित सर्कुलर जारी कर इसे पूरी तरह ट्रेडिंग हॉलिडे घोषित कर दिया। इसके बाद नितिन कामत ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की।
‘लोकल चुनाव के लिए ग्लोबल बाजार बंद?’
कामत ने पोस्ट में कहा कि आज के दौर में दुनिया के शेयर बाजार आपस में जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी नगर निगम चुनाव के कारण बाजार बंद करना खराब योजना को दर्शाता है। उन्होंने लिखा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े एक्सचेंजों को स्थानीय कारणों से बंद करना भारतीय बाजारों की तैयारी पर सवाल खड़े करता है।
‘मुझे इंसेंटिव दिखाओ…’
नितिन कामत ने अपने पोस्ट में दिवंगत निवेशक चार्ली मंगर का प्रसिद्ध कथन उद्धृत किया—
“मुझे इंसेंटिव दिखाओ और मैं तुम्हें नतीजा दिखाऊंगा।”
इसके जरिए उनका इशारा इस ओर था कि बाजार की इस तरह की छुट्टियों को चुनौती देने के लिए किसी बड़े स्टेकहोल्डर के पास कोई खास इंसेंटिव नहीं है। कामत ने आगे कहा कि ऐसे फैसले बताते हैं कि भारतीय शेयर बाजारों को अभी वैश्विक निवेशकों के भरोसे के स्तर तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
कामत की इस टिप्पणी पर बाजार से जुड़े दिग्गजों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। हेलियोस कैपिटल के फाउंडर समीर अरोड़ा ने उनके तर्कों की निरंतरता पर सवाल उठाया। अरोड़ा ने एक्स पर जवाब देते हुए लिखा,
“मुझे उम्मीद है कि आप 1 फरवरी, रविवार को भी बाजार खुले रहने पर यही राय रखेंगे।”
उन्होंने सरकार के उस फैसले का जिक्र किया, जिसमें बजट वाले दिन (रविवार) बाजार को खुला रखने का निर्णय लिया गया है। अरोड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि अगर एक्सचेंज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हैं, तो क्या विदेशी निवेशकों के लिए रविवार को बाजार खुला रखना भी उचित है?
बाजार व्यवस्था पर फिर बहस
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि भारतीय शेयर बाजारों में ट्रेडिंग हॉलिडे की नीति कितनी व्यावहारिक है और क्या इसे वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की जरूरत है। नितिन कामत की पोस्ट ने जहां सिस्टम पर सवाल उठाए, वहीं उद्योग जगत में इस मुद्दे पर मतभेद भी साफ नजर आए।