
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। भारत समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को जल्दी से जल्दी ईरान छोड़ने की सलाह दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में तैनात अपने USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को मिडिल ईस्ट की तरफ मोड़ दिया है। इस स्ट्राइक ग्रुप में कई डेस्ट्रॉयर, सबमरीन और सपोर्ट शिप शामिल हैं, और इसका नेतृत्व विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN-72) कर रहा है।
यूएसएस अब्राहम लिंकन: तैरता हुआ शहर
यूएसएस अब्राहम लिंकन को 1980 के दशक में बनाया गया था। इस पर शुरू में करीब 2.24 अरब डॉलर खर्च आए थे, जो आज की वैल्यू में लगभग 6.8 अरब डॉलर बनते हैं। इसमें दशकों तक किए गए मेंटनेंस और अपग्रेडेशन का खर्च शामिल नहीं है। 2020-21 में इसको अपग्रेड करने में करीब 16 करोड़ डॉलर खर्च किए गए।
यह पोत अपने आप में समुद्र में तैरता हुआ एक शहर और एयरबेस है, जिसमें हजारों नौसैनिक तैनात रहते हैं। इसे न्यूक्लियर पावर्ड और अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। इसका वजन 1 लाख टन से ज्यादा है और यह दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर्स में शामिल है। इसमें कई तरह के फाइटर जेट्स और हेलीकॉप्टर तैनात रहते हैं और यह खतरनाक मिसाइलों और हथियारों से लैस है।
दुनिया का सबसे महंगा एयरक्राफ्ट कैरियर
जहां यूएसएस अब्राहम लिंकन दुनिया के सबसे ताकतवर और बड़े कैरियर्स में शामिल है, वहीं यूएसएस जेरल्ड आर फोर्ड (CVN-78) को दुनिया का सबसे महंगा एयरक्राफ्ट कैरियर माना जाता है। फोर्ड क्लास के इस पोत को बनाने में 13.3 अरब डॉलर खर्च हुए। इसके अलावा रिसर्च और डेवलपमेंट पर 5 अरब डॉलर और खर्च हुए। इसे बनाने में लगभग 12 साल का समय लगा और यह अब तक का सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत माना जाता है।
राजनीतिक तनाव के बीच तैनाती
अमेरिका द्वारा USS अब्राहम लिंकन को ईरान की तरफ मोड़ने से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका कुछ घंटों में ईरान पर कार्रवाई के लिए तैयार हो सकता है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और ईरानी फौजियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह कदम सुरक्षा और शक्ति का एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, यूएसएस अब्राहम लिंकन सिर्फ एक युद्धपोत नहीं, बल्कि सैन्य शक्ति और रणनीतिक ताकत का प्रतीक है, जिसकी कीमत और क्षमता इसे वैश्विक स्तर पर अनोखा बनाती है।