Thursday, January 15

ट्रेन का किराया कैसे तय होता है? रेलवे ने बताया—यह है ‘ट्रेड सीक्रेट’, सार्वजनिक नहीं हो सकता फॉर्मूला

नई दिल्ली। ट्रेन टिकट का किराया आखिर किस आधार पर तय होता है—यह सवाल अक्सर यात्रियों के मन में उठता है। लेकिन भारतीय रेलवे का कहना है कि किराया निर्धारण का फॉर्मूला ट्रेड सीक्रेट है और इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने भी रेलवे के इस तर्क को सही ठहराते हुए इस संबंध में दाखिल एक आरटीआई अर्जी को खारिज कर दिया है।

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रेलवे ने CIC के समक्ष दलील दी कि पैसेंजर ट्रेनों के अलग-अलग वर्गों (क्लास) के किराए तय करने की पद्धति और उनका वर्गीकरण बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) के दायरे में आता है। इसलिए इसे सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत साझा करना अनिवार्य नहीं है।

क्या मांगी गई थी जानकारी?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 25 जनवरी 2024 को ऑनलाइन दायर की गई आरटीआई अर्जी में ट्रेन टिकट के बेस फेयर की गणना से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। इसमें यह जानना चाहा गया था कि

  • किराया तय करने में कौन-कौन से पैरामीटर शामिल होते हैं,
  • डायनामिक प्राइसिंग का क्या तरीका है,
  • तत्काल टिकट बुकिंग का किराए पर क्या असर पड़ता है,
  • मौसम या अन्य परिस्थितियों के हिसाब से किराए में बदलाव कैसे होता है।

हालांकि रेलवे ने इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया।

RTI के तहत छूट का हवाला

रेलवे बोर्ड के सेंट्रल पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (CPIO) ने अपने जवाब में कहा कि किराया अलग-अलग क्लास के हिसाब से तय किया जाता है और क्लासों के बीच अंतर उनमें दी जाने वाली सुविधाओं के आधार पर होता है। लेकिन किराया तय करने की नीतिगत प्रक्रिया और फॉर्मूला ट्रेड सीक्रेट की श्रेणी में आता है, इसलिए इसका खुलासा जनहित में उचित नहीं है।

CPIO ने यह भी स्पष्ट किया कि RTI एक्ट की धारा 8(1)(d) के तहत ट्रेड सीक्रेट और व्यावसायिक रूप से संवेदनशील जानकारी साझा करने से छूट दी गई है। CIC ने अपने पूर्व आदेशों में भी इस प्रावधान को सही ठहराया है।

CIC का फैसला

केंद्रीय सूचना आयोग ने माना कि रेलवे ने वह सभी जानकारियां पहले ही उपलब्ध करा दी थीं, जो सार्वजनिक की जा सकती थीं। इसके अलावा, नए सिरे से कोई डेटा तैयार करने या उसकी व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं थी। अपीलकर्ता की सुनवाई के दौरान अनुपस्थिति और रेलवे के जवाब में कोई कमी न पाते हुए, सूचना आयुक्त स्वागत दास ने अपील को खारिज कर दिया।

रेलवे का सामाजिक दायित्व

रेलवे ने यह भी कहा कि भारतीय रेलवे एक ओर जहां कमर्शियल यूटिलिटी के रूप में काम करती है, वहीं दूसरी ओर सरकार का अंग होने के नाते उसे राष्ट्रीय हित और सामाजिक दायित्वों को भी निभाना पड़ता है। ऐसे में किराया नीति में व्यावसायिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

कुल मिलाकर, यात्रियों के लिए यह जानना दिलचस्प भले हो कि ट्रेन का किराया कैसे तय होता है, लेकिन रेलवे के मुताबिक इसका पूरा गणित सार्वजनिक करना संभव नहीं है।

 

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