
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर सियासी लड़ाई तेज हो गई है। पहले चरण में 58 लाख से अधिक नाम हटा दिए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आमने-सामने आ गई हैं।
टीएमसी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर आरोप लगाया कि बीजेपी मतदाता सूची से नाम कटवाने के लिए पहले से भरे हुए फॉर्म का इस्तेमाल कर रही है। वीडियो के कैप्शन में कहा गया कि इस प्रक्रिया से ‘बांग्ला विरोधी पार्टी’ की मानसिकता सामने आ रही है, जो मतदाताओं को नागरिक के बजाय समस्या मानती है।
बीजेपी ने इस आरोप का पलटवार करते हुए टीएमसी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि यदि टीएमसी को एसआईआर की सूची पर भरोसा है, तो मतदाता सूची अधिकारियों (ERO) द्वारा बार-बार फॉर्म-7 भरने से क्यों रोका जा रहा है।
भंडारी ने आरोप लगाया कि कुमारग्राम विधानसभा क्षेत्र में ईआरओ ने फॉर्म-7 स्वीकार करने से मना कर दिया और भटपारा विधानसभा क्षेत्र में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के आने से ठीक 10 मिनट पहले ईआरओ कार्यालय छोड़कर चले गए, जिससे फॉर्म जमा नहीं हो सका।
बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी आरोप लगाया कि बेहाला पुरबा में ERO रीना घोष ने फॉर्म-7 स्वीकार नहीं किया और कोई वैध कारण नहीं बताया। मालवीय ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के पास ईआरओ कार्यालय में धरना देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
एसआईआर के पहले चरण में राज्य में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ हो गई। निर्वाचन आयोग के अनुसार, नाम हटाने के कारणों में मृत्यु, स्थायी पलायन, दोहराव और फॉर्म न भरना शामिल थे। फिलहाल, दूसरे चरण में 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई जारी है।