
मुरैना। चंबल नदी के किनारे अवैध रेत खनन और भंडारण करने वाले रेत माफियाओं के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। मंगलवार तड़के करीब 5 बजे पुलिस, वन विभाग, खनिज विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टास्कफोर्स ने राजघाट क्षेत्र में घेराबंदी कर अवैध रूप से जमा रेत के विशाल ढेरों पर बुल्डोजर चलाकर उन्हें मौके पर ही समतल कर दिया।
प्रशासन ने डंपर-ट्रॉली पकड़ने की बजाय इस बार सीधे रेत के पहाड़ों को ही जब्त कर नष्ट करने की रणनीति अपनाई, जिससे माफिया नेटवर्क में हड़कंप मच गया।
सुबह 5 बजे से कार्रवाई, 1000 ट्रॉली रेत मिट्टी में मिलाई
कार्रवाई के शुरुआती 5 घंटों में ही टास्कफोर्स ने करीब 1000 ट्रॉली से अधिक अवैध रेत भंडारण को चिन्हित कर बुल्डोजर और जेसीबी मशीनों की मदद से उसे नदी किनारे समतल कर दिया। अधिकारियों के अनुसार यह आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है, क्योंकि कई अन्य स्थानों पर भी अवैध स्टॉक की जांच जारी है।
डेढ़ करोड़ से अधिक की अवैध रेत का भंडारण
राजघाट पर अवैध रूप से जमा इस रेत की अनुमानित कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यह रेत सरकारी भूमि पर अवैध रूप से स्टॉक की गई थी, जिसका उपयोग अवैध परिवहन और बिक्री के लिए किया जाना था।
300 जवानों की फोर्स, वनकर्मी और आधा दर्जन से ज्यादा जेसीबी तैनात
इस बड़ी कार्रवाई में सुरक्षा व्यवस्था के लिए भारी पुलिस बल लगाया गया। मौके पर—
300 से अधिक पुलिस जवान
50 से अधिक वनकर्मी
खनिज और राजस्व विभाग का अमला
6 से अधिक जेसीबी मशीनें
लगातार कार्रवाई में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त मशीनरी भी मंगाई है, ताकि अवैध भंडारण का पूरी तरह सफाया किया जा सके।
पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्णायक कदम
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल अवैध खनन रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि चंबल की जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को बचाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। चंबल क्षेत्र देश के सबसे संवेदनशील पर्यावरणीय इलाकों में शामिल है।
घड़ियाल और डॉल्फिन के अस्तित्व पर संकट
विशेषज्ञों के अनुसार चंबल की रेत परतें घड़ियाल के अंडे देने और उनके प्राकृतिक जीवनचक्र के लिए बेहद जरूरी होती हैं। अवैध उत्खनन के कारण यह पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में पड़ गया था। यही नहीं, यह क्षेत्र रिवर डॉल्फिन, कछुओं और दुर्लभ पक्षियों का भी प्राकृतिक आवास है।
कलेक्टर की बैठक के बाद लिया गया निर्णय
बताया गया है कि बीते दिन कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई टास्कफोर्स की बैठक में राजघाट, कैंथरी, बरवासिन, गडोरा और गया का पुरा समेत कई घाटों पर अवैध खनन रोकने तथा जमा रेत को नष्ट करने का निर्णय लिया गया था, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई शुरू की गई।
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में खनन प्रतिबंधित
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य का करीब 435 किलोमीटर लंबा क्षेत्र देश के सबसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां रेत खनन और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध है, बावजूद इसके माफिया लंबे समय से अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
प्रशासन की इस कार्रवाई को रेत माफिया के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है कि अब अवैध खनन और भंडारण पर किसी भी स्तर पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।