
इस्लामाबाद, 14 जनवरी: ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और अमेरिकी हस्तक्षेप की आशंका ने पाकिस्तान को कूटनीतिक और सुरक्षा संकट में डाल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि मदद “बीच रास्ते” में पहुँच रही है, जिससे अफवाहें तेज हो गई हैं कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
इस बीच पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने देश के टॉप सुरक्षा अधिकारियों की आपातकालीन बैठक बुलाई। इस बैठक में ISI चीफ, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर, दक्षिणी कमांडर, मिलिट्री इंटेलिजेंस डायरेक्टर और COAS के प्रमुख अधिकारी शामिल हुए। बैठक में यह चर्चा हुई कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो पाकिस्तान की भूमिका क्या होगी और उसे किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
मुख्य चिंताएँ और खतरे:
ट्रंप पाकिस्तान से ईरान के फ्रंट को खोलने की मांग कर सकते हैं।
यदि ईरान में हालात बिगड़ते हैं, तो पाकिस्तान में शरणार्थियों का आगमन शुरू हो सकता है।
बलूचिस्तान की सीमावर्ती इलाकों में पहले से आतंकवाद की चुनौती है, जो और बढ़ सकती है।
अफगानिस्तान के साथ डूरंड लाइन पर तनाव के बीच दूसरी अस्थिर सीमा पाकिस्तान नहीं संभाल सकता।
क्या अमेरिका को एयरबेस देगा पाकिस्तान?
बैठक में सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि पाकिस्तान अमेरिका को अपने हवाई अड्डे या मिलिट्री बेस देने को मजबूर होगा या नहीं।
अमेरिकी मांग पाकिस्तान को अंदरूनी संकट में फंसा सकती है, क्योंकि देश में करीब 30% आबादी शिया मुसलमान है, जो ईरान से गहरी सहानुभूति रखते हैं।
किसी भी सैन्य कार्रवाई या सत्ता परिवर्तन की स्थिति पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और अस्थिरता पैदा कर सकती है।
स्थिति तनावपूर्ण:
पाकिस्तानी अधिकारी इस बात को लेकर सतर्क हैं कि ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप और पाकिस्तान की भागीदारी देश में राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल का कारण बन सकती है। शरणार्थियों और सीमा पर दबाव के चलते इमरजेंसी तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं।