
सलूम्बर (उदयपुर)। जिस गुरु ने मजदूरों संग कंधे मिलाकर खंडहर से ‘प्रधानमंत्री श्री योजना’ का चमकता स्कूल बनाया, आज वही शिक्षक सुनील कुमार अचानक ट्रांसफर हो गए। कालीभीत गांव के आदिवासी बच्चे कड़कड़ाती ठंड में सड़क पर हैं, क्योंकि उनके चहेते शिक्षक की कुर्सी छीन ली गई।
सुनील कुमार जब इस आदिवासी क्षेत्र के राजकीय विद्यालय में आए थे, तब हालात दयनीय थे। उन्होंने सिर्फ दफ्तरों में बैठकर काम नहीं किया, बल्कि मजदूरों के साथ ईंटें उठाईं, दीवारें खड़ी कीं और स्कूल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके इसी समर्पण का नतीजा था कि स्कूल ‘प्रधानमंत्री श्री योजना’ की सूची में शामिल हुआ।
लेकिन अब प्रशासन ने उनके योगदान को नजरअंदाज कर उन्हें रातों-रात तबादला कर दिया। स्थानीय लोग और छात्र इसे केवल राजनीतिक खेल की देन मान रहे हैं। चर्चा है कि सुनील कुमार की बढ़ती लोकप्रियता और बेबाक अंदाज कुछ राजनीतिक खेमों को नागवार गुजरा।
पिछले दो दिनों से स्कूल में पढ़ाई ठप है और बच्चे-संग ग्रामीण न्याय की गुहार लगाते धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है, “हमारे गुरुजी ने सिर्फ इमारत नहीं, बच्चों और गांव का भविष्य संवारा। उन्हें राजनीतिक खेल का शिकार नहीं बनने देंगे।”
यह मामला अब केवल तबादले का नहीं, बल्कि प्रशासन की संवेदनशीलता और स्थानीय समाज के विश्वास का भी परीक्षण बन गया है।