Wednesday, January 14

तलाकशुदा लोग कर रहे हैं दोबारा डेटिंग, अब रिश्तों में नई शर्तें और सीमाएं

नई दिल्ली: अब तलाक को जीवन का अंत नहीं, बल्कि नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। भारतीय समाज में बदलती सोच के साथ तलाकशुदा लोग दोबारा डेटिंग कर रहे हैं, लेकिन पहले की तुलना में अब वे रिश्तों में नई सीमाओं और शर्तों को महत्व दे रहे हैं।

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मैट्रिमोनी ऐप Rebounce की स्टडी के अनुसार, 2025 में दोबारा डेटिंग करने वाले हर 5 में से 3 तलाकशुदा लोगों ने रिश्तों के लिए नई प्राथमिकताएं तय की हैं। अब लोग परफेक्शन या फिल्मी रोमांस की तलाश नहीं, बल्कि भावनात्मक समझ, खुली बातचीत, व्यक्तिगत स्पेस और मानसिक सुकून को अहमियत दे रहे हैं।

इस स्टडी में 5,834 सक्रिय डेटर्स शामिल थे, जिनकी उम्र 27 से 40 साल के बीच थी और ये टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों से थे। Rebounce के फाउंडर और CEO रवि मित्तल का कहना है कि अब लोग “सेकंड चांस” को लेकर ज्यादा समझदार और स्पष्ट सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

इमोशनल उपलब्धता अब डील-ब्रेकर

सर्वे में सामने आया कि अब रिश्तों में भावनात्मक रूप से मौजूद होना सबसे बड़ा डील-ब्रेकर बन गया है। मेट्रो शहरों की करीब 44% महिलाओं और 32% पुरुषों ने माना कि पहले वे इस कमी को नजरअंदाज कर देते थे, लेकिन अब इसे समय की कमी का बहाना नहीं माना जा सकता।

मुंबई की 35 साल की तारिणी कहती हैं, “चुपचाप सब सहना कोई मजबूती नहीं होती। ऐसे इंसान के साथ रहना, जो आपके जज्बात समझने और साथ देने को तैयार नहीं है, न मेंटल हेल्थ के लिए ठीक है और न ही रिश्ते के लिए।”

फाइनेंशियल मुद्दों पर खुली बातचीत जरूरी

30 से 40 साल के तलाकशुदा डेटर्स में से 60% ने कहा कि पैसों की बात अब बेहद अहम है। इसमें कमाई का आंकड़ा नहीं, बल्कि आर्थिक समझदारी और जिम्मेदारी देखी जाती है। दिल्ली की 33 साल की समीरा बताती हैं, “हमें ऐसा पार्टनर चाहिए जो ईमानदार हो और दिखावे के लिए अपनी हैसियत से ज्यादा खर्च न करे।”

सम्मान और बराबरी की अहमियत

पुरानी गलतियों और अनुभवों से सीखते हुए महिलाएं अब किसी भी तरह के असम्मान या भावनाओं का मजाक बर्दाश्त नहीं करतीं। कोलकाता की 38 साल की परोमिता कहती हैं, “तलाक के बाद मेरी सहनशीलता कम हो गई है। मुझे ऐसा आदमी चाहिए जो समझे कि मैं सम्मान की हकदार हूं।”

निष्कर्ष: तलाकशुदा लोग अब दोबारा रिश्तों में समझदारी, साफ सोच, तालमेल और भावनात्मक उपलब्धता को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बदलाव यह दर्शाता है कि सेकंड चांस केवल प्रेम के लिए नहीं, बल्कि समझदारी और संतुलन के लिए भी अहम है।

 

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