
दुनिया के सबसे कठोर और जानलेवा इलाकों में से एक ग्रीनलैंड में तैनात डेनमार्क की एक अनोखी सैन्य इकाई इन दिनों वैश्विक चर्चा का विषय बनी हुई है। वजह है—अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान, जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड की सुरक्षा व्यवस्था पर तंज कसते हुए ‘डॉग स्लेज’ का ज़िक्र किया। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान महज़ मज़ाक नहीं, बल्कि ग्रीनलैंड की खतरनाक कुत्तों की सेना के प्रति ट्रंप की चिंता को दर्शाता है।
दरअसल, ग्रीनलैंड में तैनात यह एलीट यूनिट डेनमार्क की नौसेना का हिस्सा है, जिसे सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल के नाम से जाना जाता है। यह कोई सामान्य सुरक्षा बल नहीं, बल्कि ऐसी फोर्स है जो बर्फीले रेगिस्तान, -55 डिग्री सेल्सियस तापमान और महीनों तक बिना सूरज उगे इलाकों में भी दुश्मनों का शिकार करने में सक्षम है।
हिटलर की फौज को भी नहीं घुसने दिया था ग्रीनलैंड में
इस कुत्तों की सेना का इतिहास दूसरे विश्व युद्ध से जुड़ा है। नाजी तानाशाह हिटलर की सेना जब ग्रीनलैंड के रणनीतिक तटों पर कब्ज़ा जमाने की कोशिश कर रही थी, तब इसी डॉग स्लेज यूनिट ने जर्मन सैनिकों की घुसपैठ को नाकाम कर दिया था। दुर्गम बर्फीले इलाकों में जहां इंसानी सैनिक टिक नहीं पाते थे, वहां ये प्रशिक्षित कुत्ते दुश्मनों की आहट तक पहचान लेते थे।
युद्ध के बाद इस यूनिट को भंग कर दिया गया था, लेकिन शीत युद्ध के दौरान जब आर्कटिक क्षेत्र में सोवियत रूस के बढ़ते प्रभाव का खतरा मंडराने लगा, तब 1950 में इसे दोबारा सक्रिय किया गया।
-55 डिग्री तापमान में भी महीनों तक मिशन
यह यूनिट एक बार में लगातार पांच महीनों तक लंबी दूरी की गश्त करती है। ऐसे इलाकों में जहां इंसानी शरीर कुछ घंटों में जवाब दे देता है, वहां ये कुत्ते दुश्मनों का पीछा करते हैं, चेतावनी सिस्टम का काम करते हैं और सैनिकों को सुरक्षित रास्ता दिखाते हैं।
रिटायर्ड अमेरिकी कोस्ट गार्ड कैप्टन बॉब डेश के मुताबिक,
“ये कुत्ते पूंछ वाले एलीट सेंसर पैकेज हैं। ये ट्रांसपोर्ट भी हैं और सोते वक्त आपका अलार्म सिस्टम भी।”
ट्रंप का बयान और असली डर
एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था,
“आप जानते हैं डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा बढ़ाने के लिए क्या किया? उन्होंने एक और डॉग स्लेज जोड़ दी।”
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इस यूनिट की वास्तविक ताकत के बारे में जानकारी दी होगी। यही वजह है कि उन्होंने इसका ज़िक्र किया। डेनमार्क के पूर्व रियर एडमिरल टोरबेन ऑर्टिंग जोर्गेनसेन ने ट्रंप की टिप्पणी को “बेवकूफी भरी बेइज्जती” करार दिया, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि ग्रीनलैंड जैसे इलाके में बिना अनुभव के किसी भी सेना के लिए उतरना आत्मघाती साबित हो सकता है।
AI और ड्रोन नहीं, फिर भी अजेय
यह कुत्तों की सेना न तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस है और न ही हाईटेक सैटेलाइट सिस्टम से, लेकिन फिर भी यह उन मिशनों को अंजाम दे सकती है, जिनकी कल्पना भी आधुनिक सेनाएं नहीं कर पातीं। जन्मजात सूंघने की क्षमता, आर्कटिक वातावरण के अनुकूल शरीर और वर्षों की कठोर ट्रेनिंग इन्हें बेहद घातक बनाती है।
अगर ग्रीनलैंड पर हमला हुआ…
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भविष्य में अमेरिका या कोई भी देश ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई की कोशिश करता है, तो उसे सबसे पहले इन्हीं कुत्तों की सेना से जूझना होगा। अपने ही इलाके में लड़ने वाली यह फोर्स किसी भी आधुनिक सेना के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
ग्रीनलैंड की बर्फीली धरती पर आज भी वही संदेश गूंज रहा है—
यहां हथियार नहीं, माहौल जीतता है… और इस माहौल के असली बादशाह हैं ये खतरनाक कुत्ते।