
नई दिल्ली। चीन के साथ सीमा विवाद और शक्सगाम घाटी को लेकर बढ़े तनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के नेताओं की नई दिल्ली में हुई मुलाकात ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बैठक को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है और कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि जब चीन शक्सगाम घाटी में निर्माण गतिविधियां तेज कर रहा है, लद्दाख में अतिक्रमण किए बैठा है और अरुणाचल प्रदेश में नए गांव बसा रहा है, उसी समय बीजेपी मुख्यालय में सीपीसी के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत देश की सुरक्षा और विदेश नीति पर गंभीर संदेह पैदा करती है।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर बीजेपी और सीपीसी नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि यह वही चीन है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का साथ दिया था और गलवान घाटी में हमारे जांबाज सैनिकों की शहादत हुई थी। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे हालात में यह बैठक आखिर किस उद्देश्य से की गई?
कांग्रेस के तीन तीखे सवाल
कांग्रेस नेता ने सीधे तौर पर तीन सवाल उठाए—
- बीजेपी और चीन के बीच कौन सा गुप्त समझौता हुआ है?
- जब चीन भारत की जमीन पर अतिक्रमण कर रहा है, तब बातचीत का औचित्य क्या है?
- प्रधानमंत्री मोदी चीन को ‘लाल आंख’ कब दिखाएंगे?
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो भी साझा करते हुए आरोप लगाया कि मोदी सरकार में भारत की विदेश नीति ‘वेंटिलेटर पर’ है। पार्टी का कहना है कि शक्सगाम घाटी में चीन की गतिविधियों के बावजूद सरकार की ओर से ठोस और सख्त कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना’ के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीपीसी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सन हयान ने किया। बैठक में बीजेपी महासचिव अरुण सिंह के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा।
बीजेपी के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने जानकारी दी कि इस बैठक में बीजेपी और सीपीसी के बीच अंतर-दलीय संवाद को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। उनके अनुसार, यह संवाद दोनों देशों के प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच संचार और आपसी समझ को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।
इस बैठक में भारत में चीन के राजदूत शु फीहोंग भी मौजूद रहे। बीजेपी का कहना है कि यह दौरा राजनीतिक दलों के स्तर पर संवाद बनाए रखने की एक कूटनीतिक पहल है, जबकि कांग्रेस इसे राष्ट्रीय हितों के खिलाफ और सरकार की दोहरी नीति का उदाहरण बता रही है।
बीजेपी–चीन मुलाकात को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर भारत–चीन संबंधों, सीमा सुरक्षा और विदेश नीति को सियासी बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।