Tuesday, January 13

अवैध खनन ने अरावली को किया बर्बाद: 120 झरने-तालाब हुए खत्म, एनजीटी में रिपोर्ट में खुलासा

 

This slideshow requires JavaScript.

 

उत्तर भारत की जीवनरेखा मानी जाने वाली अरावली की पहाड़ियां आज अपने अस्तित्व की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही हैं। हरियाणा वन विभाग ने हाल ही में एनजीटी में पेश की गई रिपोर्ट में खुलासा किया कि अवैध खनन और अतिक्रमण के कारण पिछले 25 सालों में अरावली के जंगलों में स्थित 120 से अधिक जल निकाय, झरने और तालाब पूरी तरह से समाप्त हो चुके हैं।

 

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ढाई दशक पहले फरीदाबाद, गुड़गांव और नूंह जिलों में लगभग 265 झरने और तालाब थे। आज इनमें से केवल 55 के करीब ही बचे हैं। ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल रहे बड़खल और दमदमा के झरने अब केवल इतिहास बन गए हैं। सूरजकुंड के प्राचीन तालाब और झरने, जो कभी भूजल स्तर बनाए रखने में मदद करते थे, अवैध निर्माण की भेंट चढ़ चुके हैं।

 

विशेष रूप से नूंह जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है। फिरोजपुर झिरका में 20 से ज्यादा झरने सूख चुके हैं। साथ ही, कोटला मुबारकपुर और तावड़ू के झरने भी जलमुक्त हो गए हैं। इसके अलावा खनन माफियाओं की सक्रियता के कारण लगभग 500 एकड़ घने जंगल भी नष्ट हो गए हैं।

 

पर्यावरणविदों की चेतावनी:

नकुल राव और सेव अरावली जैसे अभियानों के कार्यकर्ताओं का कहना है कि अरावली केवल पहाड़ नहीं हैं, बल्कि दिल्ली एनसीआर का सुरक्षा कवच हैं। उन्होंने चेताया कि अवैध कब्जे और माइनिंग पर रोक न लगी तो यह क्षेत्र धीरे-धीरे मरूस्थल में बदल जाएगा। उन्होंने सरकार से लुप्त झरनों और जल स्रोतों के पुनरुद्धार के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने की भी मांग की।

 

फरीदाबाद के डीएफओ सुरेंद्र ने बताया कि वन विभाग वॉटर बॉडीज को पुनर्जीवित करने के लिए काम कर रहा है। इसके तहत चेक डैम बनाए जा रहे हैं और बरसात का पानी पहाड़ों में रोका जाएगा, ताकि जल स्तर को बनाए रखा जा सके।

 

Leave a Reply