
नई दिल्ली / गुजरात: अमेरिकी टैरिफ के बाद भारत ने दूसरे देशों के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में दोनों देशों के बीच 19 अहम समझौतों और 8 घोषणाओं पर सहमति बनी।
प्रधानमंत्री और जर्मन चांसलर की मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि रक्षा और सुरक्षा में बढ़ता सहयोग हमारे आपसी विश्वास और साझा दृष्टिकोण का प्रतीक है। दोनों देश अब रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने के लिए योजना पर काम करेंगे, जिससे सह-विकास और सह-उत्पादन के नए अवसर खुलेंगे।
विशेष बात यह है कि अब भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जर्मनी के माध्यम से वीजा–फ्री ट्रांजिट की सुविधा उपलब्ध होगी।
मुख्य क्षेत्रों में समझौते और घोषणाएं
- द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के फोरम की स्थापना।
- भारत–जर्मनी आर्थिक और निवेश समिति को एकीकृत करना।
- सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों (लिथियम, कोबाल्ट) के क्षेत्र में साझेदारी।
- दूरसंचार और डिजिटल तकनीक में सहयोग।
- उच्च शिक्षा, हेल्थकेयर, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लाइमेट-रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सहयोग।
- राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान और इनफिनियॉन टेक्नोलॉजीज एजी के बीच एमओयू।
- अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और चैरिटे विश्वविद्यालय, जर्मनी के बीच एमओयू।
- पेट्रोलियम, गैस, मैरीटाइम और खेल क्षेत्रों में सहयोग।
- डिजिटल और ग्रीन डेवलपमेंट पार्टनरशिप के तहत 1.24 बिलियन यूरो की नई फंडिंग कमिटमेंट।
- त्रिकोणीय विकास सहयोग के माध्यम से घाना, कैमरून और मलावी में कृषि, तकनीकी नवाचार और उद्यमिता केंद्रों का विस्तार।
दूरगामी महत्व
यह समझौता सिर्फ व्यापार और टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत–जर्मनी दोस्ती को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का अवसर है। रक्षा, विज्ञान, डिजिटल, हरित ऊर्जा और वैश्विक निवेश के क्षेत्रों में यह कदम दोनों देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से लाभकारी साबित होगा।