
मध्यप्रदेश की गलियों और मुख्य सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे आवारा कुत्तों और बेसहारा मवेशियों के खिलाफ मोहन सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नई SOP जारी की है, जो शहरों की तस्वीर बदलने का दावा करती है।
खूनी आंकड़े: 6 महीने, 14 हजार शिकार
प्रदेश के छह बड़े शहरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रतलाम—को पूरी तरह ‘रैबीज मुक्त’ करने का महाभियान शुरू किया जा रहा है। साल 2025 के शुरुआती छह महीनों में इन शहरों में 13,947 लोग कुत्तों के काटने का शिकार बन चुके हैं।
किलानुमा बाउंड्रीवाल से सुरक्षित सार्वजनिक स्थल
नई SOP के तहत स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील इलाकों के चारों ओर ऊंची बाउंड्रीवाल बनाई जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन ‘सेफ जोन’ में एक भी कुत्ता या मवेशी नहीं दिखना चाहिए। स्थानीय निकायों को आदेश दिए गए हैं कि वे सबसे अधिक प्रभावित ‘हॉटस्पॉट्स’ को तुरंत चिन्हित करें।
आश्रय और मवेशियों की सुरक्षा
सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मवेशियों को गौशालाओं और शेल्टर होम्स में सुरक्षित ठिकाना दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य साफ है: आम आदमी की सुरक्षा सर्वोपरि होगी, और बेसहारा जानवरों को भी व्यवस्थित आश्रय मिलेगा।
विशेष टिप्पणी:
इस महाभियान से शहरों में आवारा जानवरों का आतंक कम होने और जनता की सुरक्षा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, प्रशासन की चुनौती यह होगी कि योजना का क्रियान्वयन सुचारु रूप से हो और संवेदनशील स्थलों में पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।