Tuesday, January 13

‘मैं IPS नीरज ठाकुर, PM का आदेश है जानकारी लीक नहीं हो’, रिटायर्ड अफसर को 48 दिन घर में रखा कैद

 

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ग्वालियर में डिजिटल अरेस्ट का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने रिटायर्ड उप-पंजीयक बिहारीलाल गुप्ता (75 वर्ष) को झांसा देकर 1.12 करोड़ रुपए की ठगी की। ठगों ने खुद को TRAI, IPS और CBI अधिकारी बताकर बुजुर्ग को डराया-धमकाया और 48 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा।

 

कैसे हुई ठगी

ठगों ने बुजुर्ग को फोन कर कहा कि उनका मोबाइल नंबर और आधार कार्ड बंद होने वाला है और उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाया गया है। कुछ देर बाद वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति ने खुद को IPS अधिकारी नीरज ठाकुर बताया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आदेशानुसार जानकारी लीक नहीं हो सकती। डराने के बाद बुजुर्ग से बैंक खाता, संपत्ति और म्यूचुअल फंड निवेश की पूरी जानकारी निकाली गई।

 

75 साल के बुजुर्ग से ठगी के 4 बैंक खाते

ठगों ने बुजुर्ग को अपने SBI और पत्नी के बैंक ऑफ बड़ौदा खातों से चार अलग-अलग खातों में कुल 1.12 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उन्होंने फर्जी RBI की सील लगी रसीद भी भेजी और फोन बंद कर दिया।

 

ठगी का पता चला तब जाकर दर्ज हुई FIR

बुजुर्ग ने ठगी का एहसास तब किया जब उन्होंने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े अन्य वीडियो सोशल मीडिया पर देखे। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

 

साइबर पुलिस की कार्रवाई

साइबर क्राइम पुलिस अब अज्ञात ठगों की तलाश में जुटी है और मामले की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों ने जनता को चेतावनी दी है कि किसी भी फोन कॉल या मैसेज में किसी अधिकारी के नाम पर धमकाने पर जानकारी तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम थाने को दें।

 

विशेष टिप्पणी:

यह मामला डिजिटल फ्रॉड और ठगी के आधुनिक तरीकों का गंभीर उदाहरण है। बुजुर्गों को ठगी और झांसे से बचाने के लिए परिवार और स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने की जरूरत है।

 

 

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