
नई दिल्ली: गलवान घाटी की घटना के बाद भारत-चीन संबंधों में आई खटास को दूर करने के प्रयासों के तहत, चीन की सत्ताधारी चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को भारत आया। सबसे पहले यह प्रतिनिधिमंडल बीजेपी मुख्यालय गया और उसके बाद दिल्ली स्थित आरएसएस मुख्यालय में पहुंचा। इस मुलाकात का समय और स्वरूप दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और राजनीतिक बातचीत की दिशा को दर्शाता है।
बीजेपी नेताओं से CPC प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात
बीजेपी मुख्यालय में प्रतिनिधिमंडल का स्वागत पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं ने किया। बैठक में चर्चा का मुख्य विषय बीजेपी और CPC के बीच संवाद और बातचीत को कैसे बढ़ाया जाए रहा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में भारत में चीन के राजदूत शू फेहॉन्ग भी शामिल थे।
बीजेपी महासचिव अरुण सिंह ने बैठक के बाद कहा, “हमने CPC के साथ अंतर-पार्टी संवाद और सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। यह कोई गुप्त समझौता नहीं है, बल्कि सार्वजनिक और पारदर्शी वार्ता है।”
आरएसएस मुख्यालय में CPC प्रतिनिधिमंडल
इस प्रतिनिधिमंडल ने बाद में आरएसएस मुख्यालय, झंडेवालान का दौरा किया और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से मुलाकात की। आरएसएस का शताब्दी वर्ष चल रहा है, ऐसे समय में यह कूटनीतिक कदम काफी अहम माना जा रहा है।
बदला हुआ परिदृश्य: गलवान के बाद
- जून 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया था।
- इस दूरी को कम करने की कोशिशें लगभग पांच साल चलीं।
- अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद राजनयिक और व्यापारिक बातचीत में मजबूती आई।
- अब दोनों देशों के बीच सीधे विमानों की आवाजाही और राजनीतिक प्रतिनिधिमंडलों का दौरा फिर से शुरू हो गया है।
बीजेपी और CPC की बातचीत पर राजनीतिक दृष्टि
कांग्रेस और विपक्षी दल अक्सर बीजेपी पर चीन के साथ गुप्त समझौते करने के आरोप लगाते रहे हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह मुलाकात सिर्फ सार्वजनिक और पारदर्शी संवाद है। बीजेपी नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “दुनिया भर के राजनीतिक दलों के साथ इस तरह की आपसी चर्चा होती रहती है। हमारी बातचीत भी वही है।”
सदस्यता में अंतर
- CPC के कुल सदस्य: 10.27 करोड़ (जून 2024 के अनुसार)
- बीजेपी के सदस्य: 18 करोड़ (2025 में सदस्यता अभियान के बाद)
इस मुलाकात का उद्देश्य गलवान के बाद बिगड़े संबंधों को पटरी पर लाना और दोनों दलों के बीच समझ बढ़ाना बताया जा रहा है।