Tuesday, January 13

MP में भ्रष्टाचार का नया विवाद: टंट्या मामा की मेटल मूर्ति की जगह फाइबर लगी, कांग्रेस ने जांच की मांग की

 

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मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में आदिवासी जननायक और स्वतंत्रता संग्राम नायक टंट्या मामा भील की प्रतिमा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बिस्टान नाका चौराहे पर स्थापित मूर्ति धातु या संगमरमर की होने के बजाय फाइबर की निकली, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

 

कलेक्टर ने दिए कड़े निर्देश

जिला कलेक्टर भव्य मित्तल ने मामले की पुष्टि करते हुए दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ठेकेदार को अपने खर्च पर निर्धारित मापदंडों के अनुसार नई मूर्ति स्थापित करनी होगी।

 

2022 में ऐलान, 2025 में लोकार्पण

दिसंबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने बिस्टान नाका चौराहे का नाम टंट्या मामा चौराहा रखने और वहां उनकी प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की थी। इस क्रम में 15 नवंबर 2025 को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर नगर पालिका ने मूर्ति का लोकार्पण किया।

 

लोकार्पण के बाद शिकायतें

लोकार्पण के बाद शिकायतें सामने आईं कि मूर्ति निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। कलेक्टर भव्या मित्तल ने कहा कि विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मूर्ति FRP (फाइबर) की बनी है। नगर पालिका के मुख्य नगर अधिकारी (CMO) को ठेकेदार, सहायक यंत्री और उपयंत्री को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

ठेकेदार ने स्वीकार की गलती

ठेकेदार ने गलती स्वीकार करते हुए माफी पत्र सौंपा और कहा कि मूर्ति को निःशुल्क दान करेगा और किसी भी भुगतान का दावा नहीं करेगा। नगर पालिका की PIC बैठक में आगे की कार्रवाई और नई मूर्ति की सामग्री पर फैसला लिया जाएगा।

 

राजनीतिक प्रतिक्रिया

जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक ने आरोप लगाया कि 24 सितंबर 2025 की PIC बैठक में स्पष्ट रूप से पत्थर या धातु की मूर्ति लगाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन करीब 9.90 लाख रुपये की बताई जा रही मूर्ति फाइबर की निकली। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

 

संपादकीय टिप्पणी:

यह मामला केवल मूर्ति निर्माण का विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार पर प्रकाश डालता है। आदिवासी नायक की प्रतिष्ठा और जनता की भावनाओं के साथ किसी भी तरह का समझौता अस्वीकार्य है।

 

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