
नई दिल्ली: इसरो का PSLV-C62 मिशन सोमवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:18 बजे लॉन्च हुआ, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण यह असफल हो गया। यह लगातार दूसरी बार है जब PSLV रॉकेट से सैटेलाइट लॉन्च मिशन फेल हुआ है।
PSLV-C62 मिशन का महत्व
यह PSLV रॉकेट की 64वीं उड़ान और PSLV-डीएल वैरियंट की पांचवीं उड़ान थी। मिशन के तहत:
- भारत का DRDO सैटेलाइट EOS-N1 (Anvesha)
- भारत और विदेशों के स्टार्टअप व शैक्षणिक संस्थानों द्वारा विकसित 14 अन्य को–पैसेंजर सैटेलाइट
- री–एंट्री कैप्सूल का परीक्षण
को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाना था। इस मिशन का उद्देश्य भारत की सैन्य और वैज्ञानिक क्षमताओं को अंतरिक्ष में बढ़ाना और अंतरिक्ष में नई तकनीकों का परीक्षण करना था।
तकनीकी गड़बड़ी कैसे हुई
इसरो के अनुसार, PSLV एक चार–चरणों वाला रॉकेट है, जिसमें दो ठोस और दो तरल ईंधन वाले चरण शामिल हैं।
- लॉन्च के बाद रॉकेट का प्रदर्शन तीसरे चरण तक सामान्य रहा।
- लेकिन तीसरे चरण के अंतिम समय में रॉकेट की घूमने की गति में असामान्य बदलाव देखा गया।
- इसके कारण उड़ान की दिशा में विचलन आया और सभी सैटेलाइट्स निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं हो सके।
इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि मिशन की गहन जांच जारी है और भविष्य के लॉन्च में जरूरी सुधार किए जाएंगे ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न आए।
PSLV-C61 मिशन से तुलना
इसरो का यह PSLV मिशन लगातार दूसरी विफलता है। इससे पहले 18 मई 2025 को PSLV-C61 के जरिये EOS-09 सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने की कोशिश तीसरे चरण में तकनीकी समस्या के कारण विफल रही थी।
अंतरराष्ट्रीय और स्टार्टअप पेलोड
इस मिशन में नेपाल, यूके, ब्राजील, थाईलैंड और स्पेन के सैटेलाइट शामिल थे। इसके अलावा भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित तकनीकी पेलोड जैसे AI प्रोसेसिंग, ऑन–ऑर्बिट रीफ्यूलिंग डेमोंस्ट्रेटर और कृषि डेटा संग्रह उपकरण भी इस मिशन का हिस्सा थे।
इसरो का कहना है कि PSLV की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आगामी मिशनों में तकनीकी सुधार और कड़ी जांच की जाएगी।