
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के किल्लौद ब्लॉक के सात गांवों में फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। ग्रामीण वर्षों से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है।
मीडिया ने जब इस संकट को लेकर मांधाता विधायक नारायण पटेल से सवाल किया, तो उन्होंने सीधे जवाब देने की बजाय कहा, “पहले भोजन कर लीजिए।” इसके बाद विधायक मौके से चले गए। उनका यह व्यवहार कैमरे में कैद हुआ और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी में फ्लोराइड की मात्रा 2.0 से 5.0 पीपीएम तक है, जो स्वास्थ्य मानक से कहीं अधिक है। इसके कारण ग्रामीण फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। दांत गिरना, दृष्टि कमजोर होना, बालों का सफेद होना और जोड़ों में लगातार दर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशासन और सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि क्या खंडवा प्रशासन इंदौर जैसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है। ग्रामीणों को वैकल्पिक पेयजल, स्वास्थ्य जांच और ठोस समाधान नहीं मिला है। अधिकारी मौके पर आए, लेकिन सिर्फ हैंडपंप और ट्यूबवेल पर लाल निशान लगा कर जिम्मेदारी पूरी मान बैठे।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से शिकायत की थी, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। उनकी मांग है कि जल्द से जल्द शुद्ध पानी की व्यवस्था की जाए और स्वास्थ्य संबंधी ठोस कदम उठाए जाएँ।
खंडवा में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो रही है, और जनता की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।