
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील को लेकर एक बार फिर सकारात्मक संकेत मिले हैं। दोनों देश आज से प्रस्तावित व्यापार समझौते पर दोबारा बातचीत शुरू करने जा रहे हैं। भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को यह जानकारी दी। उनके बयान के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और सेंसेक्स 700 अंकों की गिरावट से उबरकर 300 अंकों की तेजी के साथ बंद हुआ।
यह साफ संकेत है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को बाजार और निवेशक कितनी अहमियत दे रहे हैं। लगातार पांच कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद बाजार में आई इस मजबूती को सीधे तौर पर दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई गर्माहट से जोड़ा जा रहा है।
“इस सदी की सबसे अहम साझेदारी”
नई दिल्ली पहुंचते ही अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदारी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल टैरिफ और बाजार तक पहुंच तक सीमित नहीं हैं।
गोर ने कहा, “असली दोस्त आपस में असहमत हो सकते हैं, लेकिन अंत में वे अपने मतभेद सुलझा लेते हैं। अमेरिका और भारत न सिर्फ साझा हितों, बल्कि उच्चतम स्तर पर बने मजबूत रिश्तों से जुड़े हैं।”
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ट्रंप प्रशासन की ओर से यह कहा जा रहा था कि भारत इस समझौते को अंतिम रूप देने में देरी कर रहा है।
ट्रंप-मोदी की दोस्ती पर जोर
अमेरिकी राजदूत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निजी दोस्ती को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वह खुद इस रिश्ते के गवाह रहे हैं।
ट्रेड डील पर बातचीत को लेकर गोर ने बताया, “दोनों पक्ष सक्रिय रूप से चर्चा कर रहे हैं। वास्तव में, व्यापार पर अगली बातचीत मंगलवार को होगी। भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है, इसलिए इतने बड़े समझौते को अंतिम रूप देना आसान नहीं है।”
किन मुद्दों पर अटका है समझौता?
भारत और अमेरिका काफी समय से दो स्तरों पर बातचीत कर रहे हैं—
- एक ढांचागत व्यापार समझौता, जिसमें अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ का समाधान निकाला जाएगा।
- एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता, जो दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
फिलहाल अमेरिका ने भारत पर 50% तक के टैरिफ लगाए हुए हैं, जिनमें रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया 25% अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। यही मुद्दे बातचीत में सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
500 अरब डॉलर का बड़ा लक्ष्य
प्रस्तावित समझौते का सबसे बड़ा लक्ष्य 2030 तक भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। हालांकि, व्यापार से जुड़े कई मुद्दे अभी भी विवादास्पद हैं।
गोर ने स्पष्ट किया कि यह साझेदारी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “व्यापार हमारे रिश्ते के लिए अहम है, लेकिन हम सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी मिलकर काम कर रहे हैं।”
अमेरिका की रणनीति में भारत ‘अपरिहार्य’
भारत को अमेरिका की वैश्विक रणनीति के लिए “अपरिहार्य साझेदार” बताते हुए राजदूत गोर ने कहा,
“भारत से ज्यादा जरूरी कोई भागीदार नहीं है। आने वाले महीनों और वर्षों में हमारा लक्ष्य एक बेहद महत्वाकांक्षी एजेंडा को आगे बढ़ाना है, जिसे हम सच्चे रणनीतिक साझेदारों के रूप में मिलकर पूरा करेंगे।”
निष्कर्ष
आज से शुरू हो रही यह बातचीत न सिर्फ भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। अगर दोनों देश मतभेद सुलझाने में सफल रहते हैं, तो 500 अरब डॉलर का लक्ष्य न केवल संभव होगा, बल्कि इससे निवेश, रोजगार और बाजारों में स्थायी मजबूती भी आएगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।