
पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। चर्चा में हिस्सा लेते हुए जगदीशपुर से जदयू विधायक भगवान सिंह कुशवाहा की विपक्षी सदस्यों के साथ तीखी नोकझोंक हो गई। इसी दौरान कुशवाहा ने राजद और भाकपा माले के गठबंधन को लेकर सवाल उठाते हुए बड़ा राजनीतिक हमला बोला।
उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव क्या सोचते हैं, क्योंकि वह मंगलवार को सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या तेजस्वी यादव अब सौ दिन तक नहीं बोलेंगे या सौ दिन तक सदन में नहीं आएंगे?
नीतीश सरकार की योजनाएं गिनाईं, विपक्ष से समर्थन की अपील
विधानसभा में बोलते हुए भगवान सिंह कुशवाहा ने नीतीश सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार अब हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज खोलने जा रही है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों की ओर देखते हुए सवाल किया—
“अगर आपके प्रखंड में डिग्री कॉलेज खुलेगा तो क्या आपके बच्चे नहीं पढ़ेंगे?”
उन्होंने कहा कि अब हर घर में बिजली पहुंच चुकी है, जिससे बच्चों की पढ़ाई में सुधार होगा और यह फैसला राज्य के हित में है, इसलिए विपक्ष को भी इसका समर्थन करना चाहिए।
‘चरवाहा विद्यालय’ को लेकर छिड़ी बहस
जब भगवान सिंह कुशवाहा अपनी बात रख रहे थे, तब विपक्षी सदस्य लगातार टोका-टाकी करते रहे। इस पर कुशवाहा ने राजद के सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा—
“आपके समय तो चरवाहा विद्यालय खुला था, लेकिन वह चला ही नहीं। आज कोई चरवाहा विद्यालय नहीं चल रहा।”
इस टिप्पणी के बाद राजद विधायक आलोक कुमार मेहता खड़े हो गए और उन्होंने कुशवाहा पर पलटवार करते हुए कहा कि वह पहले भाकपा माले जैसे क्रांतिकारी दल से जुड़े रहे हैं, लेकिन अब उनकी भाषा दक्षिणपंथी सोच जैसी हो गई है, जो निंदनीय है।
कुशवाहा का बड़ा सवाल: माले नेता अब लालू के साथ कैसे?
राजद विधायक के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि उन्हें दक्षिणपंथी कहे जाने से फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने दावा किया कि जो बातें वह कह रहे हैं, उसका समर्थन विपक्ष भीतर से करता है।
इसी क्रम में उन्होंने भाकपा माले और राजद गठबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा—
“इस सदन में जनसंहार का सबसे ज्यादा विरोध कौन करता था? माले के साथी। वे कहते थे कि लालू राज में नरसंहार हुआ। सौ से ज्यादा लोग गिनाते थे। अब ये लोग वहां कैसे चले गए? कौन टैबलेट मिल गया है आपको?”
कुशवाहा के इस बयान के बाद सदन में हंगामा और बढ़ गया और विपक्षी सदस्य विरोध जताने लगे।
राहुल शर्मा से भी हुई बहस
जब भगवान सिंह कुशवाहा अपनी बात रख रहे थे, उसी दौरान राजद विधायक राहुल शर्मा ने उन्हें टोका। इस पर कुशवाहा ने कहा—
“माननीय राहुल जी, पहले आप हम लोग के साथ ही थे।”
उन्होंने आगे कहा कि जहानाबाद, अरवल, गया, औरंगाबाद और भोजपुर जैसे इलाकों में पहले सबसे अधिक हिंसक घटनाएं होती थीं, लेकिन अब स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि क्या आज वैसा जनसंहार हो रहा है?
भगवान सिंह कुशवाहा का राजनीतिक इतिहास
गौरतलब है कि भगवान सिंह कुशवाहा ने वर्ष 1990 में पहली बार धुर वामपंथी संगठन इंडियन पीपुल्स फ्रंट (IPF), जो बाद में भाकपा माले के रूप में जाना गया, के टिकट पर जगदीशपुर से विधानसभा चुनाव जीतकर सदन में प्रवेश किया था।
इसके बाद 1991 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने IPF के तीन विधायकों को अपने दल में शामिल कर लिया था, जिनमें भगवान सिंह कुशवाहा भी शामिल थे। कुशवाहा अलग-अलग समय में जदयू और राजद दोनों दलों में रहे हैं। वर्ष 2014 में उन्होंने राजद के टिकट पर आरा से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में वह जगदीशपुर से जदयू विधायक हैं।
सदन में राजनीतिक तकरार जारी
बजट सत्र के दौरान इस बहस ने सदन में सियासी तकरार को और तेज कर दिया है। एक ओर जहां जदयू विधायक सरकार की योजनाओं को जनता हित में बता रहे हैं, वहीं विपक्ष सरकार पर सवाल उठाकर विरोध दर्ज करा रहा है।