
पटना। बिहार विधानसभा सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को नीतीश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश किया। वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत करते हुए विकास का रोडमैप सामने रखा। सरकार ने इसे बिहार को नई गति देने वाला बजट बताया, लेकिन विशेषज्ञों की नजर में यह बजट उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर सका।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार की अर्थव्यवस्था अब भी बड़े पैमाने पर केंद्र सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर निर्भर है। ऐसे में राज्य के आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल की दिशा में ठोस बदलाव दिखाई नहीं दे रहा।
बजट के आकार में बिहार अब भी पीछे
बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (BIPFP) के फैकल्टी सदस्य बख्शी अमित कुमार सिन्हा ने बजट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बजट के आकार के लिहाज से बिहार अभी भी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों से काफी पीछे है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश का बजट 8.1 लाख करोड़ रुपये, जबकि महाराष्ट्र का बजट 7.6 लाख करोड़ रुपये है। इसके मुकाबले बिहार का बजट राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 10वें स्थान पर आता है।
प्रति व्यक्ति बजट आवंटन लगभग 27 हजार रुपये
बख्शी अमित कुमार सिन्हा के अनुसार, 2026-27 में बिहार का प्रति व्यक्ति बजट आवंटन लगभग 27,000 रुपये बैठता है। उन्होंने यह भी बताया कि बिहार के कुल राजस्व का करीब 73.6 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार से प्राप्त होता है, जिसमें
55.4 प्रतिशत टैक्स शेयर
18.2 प्रतिशत सहायता अनुदान
शामिल है।
विशेषज्ञों ने इसे बिहार के वित्तीय भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बताया, क्योंकि अत्यधिक निर्भरता राज्य की आर्थिक आत्मनिर्भरता को कमजोर बनाती है।
केंद्रीय अनुमान और वास्तविक प्रावधान में 6000 करोड़ का अंतर
बजट पर चिंता जाहिर करते हुए बख्शी अमित कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार सरकार ने केंद्र से 1.58 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया है, जबकि केंद्रीय बजट में बिहार के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये का ही प्रावधान किया गया है।
इस प्रकार करीब 6,000 करोड़ रुपये का अंतर सामने आता है, जो राज्य की वित्तीय योजना के लिए चुनौती बन सकता है। यह अंतर बिहार के कुल बजट का लगभग 2 प्रतिशत है।
राजकोषीय अनुशासन और स्थिर विकास की कोशिश
वहीं पटना विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर अविरल पांडे ने बजट को बिहार की प्रगति के लिए स्थिर आधार देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत के आसपास रखकर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा कि बजट परिव्यय में 30,694 करोड़ रुपये की वृद्धि यह दिखाती है कि सरकार ने प्रयोग करने के बजाय मजबूती के साथ आगे बढ़ने की रणनीति अपनाई है।
अविरल पांडे के अनुसार, यह बजट धीरे-धीरे लेकिन स्थिर विकास की नींव रखता है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार कौशल विकास, महिलाओं की कार्यबल भागीदारी, पर्यटन, खेल, शहरीकरण और निजी पूंजी निवेश जैसे क्षेत्रों को रोजगार और उत्पादन से कैसे जोड़ती है।
सात निश्चय-3 के तहत 1 करोड़ नौकरियों का लक्ष्य
बजट में सरकार ने सात निश्चय-3 योजना के तहत कई बड़े लक्ष्य तय किए हैं। इसमें प्रमुख रूप से—
1 करोड़ रोजगार सृजन
प्रति व्यक्ति आय दोगुनी करने का लक्ष्य
स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाना
शामिल है।
विकास खर्च को प्राथमिकता, लेकिन पूंजीगत व्यय घटा
बख्शी अमित कुमार सिन्हा ने यह भी बताया कि सरकार ने 2.31 लाख करोड़ रुपये विकास खर्च के लिए आवंटित किए हैं, जो कुल बजट का 66.5 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है।
हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि बजट का बड़ा हिस्सा रखरखाव और स्थापना लागत में खर्च हो जाता है। इसके अलावा एक अहम मुद्दा यह है कि 2025-26 की तुलना में 2026-27 में पूंजीगत व्यय में 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो विकास की गति पर असर डाल सकती है।
विशेषज्ञों की राय: बजट स्थिर है, लेकिन आत्मनिर्भरता का सवाल बना
विशेषज्ञों की राय में बिहार का बजट 2026-27 विकास के लिए स्थिर आधार तो तैयार करता है, लेकिन केंद्रीय फंड पर अत्यधिक निर्भरता, पूंजीगत व्यय में गिरावट और अनुमानित केंद्रीय सहायता में अंतर जैसी चुनौतियां सरकार के सामने बड़ी परीक्षा बन सकती हैं।
कुल मिलाकर यह बजट विकास का खाका जरूर पेश करता है, लेकिन बिहार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए इसमें और ठोस कदमों की जरूरत महसूस की जा रही है।