Tuesday, January 13

अनिल अंबानी को मिली राहत के खिलाफ तीन बैंकों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की

नई दिल्ली। कर्ज में डूबे उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले महीने बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी थी, लेकिन अब इस आदेश के खिलाफ तीन बैंकों ने अपील दायर कर दी है।

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तीनों बैंकों का कहना है कि हाई कोर्ट का आदेश 2020 की फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट (FAR) के आधार पर अनिल अंबानी के खातों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाता है, जो विनाशकारी परिणाम ला सकता है। कोर्ट की एकल पीठ ने दिसंबर में यह मानते हुए राहत दी थी कि FAR 2020 रिपोर्ट भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2024 मास्टर डायरेक्शन के अनुसार ‘व्यावसायिक बैंकों में धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन’ का उल्लंघन करती है।

बैंकों का तर्क

अपील में बैंकों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने डिविजन बेंच के समक्ष कहा कि जस्टिस मिलिंद जाधव के निष्कर्ष अनिल अंबानी द्वारा दाखिल मुकदमे या अंतरिम राहत की अर्जी पर आधारित नहीं थे। ऑडिट रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया कि फंड का दुरुपयोग और गबन हुआ। मेहता ने दलील दी कि अगर इस आदेश पर रोक नहीं लगाई गई तो इसके गंभीर और विनाशकारी परिणाम सामने आ सकते हैं।

अनिल अंबानी की दलील

अनिल अंबानी की ओर से यह तर्क रखा गया कि उन्होंने FAR रिपोर्ट को उसके गुणों के आधार पर कभी चुनौती नहीं दी। उनके वकील ने कहा कि 2024 का RBI मास्टर डायरेक्शन 2016 के पुराने सर्कुलर को सुपरसीड करता है और फोरेंसिक ऑडिट के लिए नियुक्त ‘बाहरी ऑडिटर’ कंपनी अधिनियम के तहत प्रमाणित होना चाहिए।

मामला और विवाद

BCCL, रिलायंस ग्रुप सहित कई अन्य मामलों के समान, यह मामला भी बड़े उद्योगपतियों और बैंकों के बीच वित्तीय विवाद और नियमों के अनुपालन को लेकर चल रहा है। अदालत में इस अपील पर आगे की सुनवाई होने वाली है, जो तय करेगी कि अनिल अंबानी को मिली अंतरिम राहत कायम रहेगी या इसे रद्द किया जाएगा।

निष्कर्ष: अनिल अंबानी के खिलाफ बैंकों की अपील से साफ है कि वित्तीय मामलों में नियमों और ऑडिट रिपोर्ट की वैधता पर अब भी विवाद बना हुआ है। निवेशकों और उद्योग जगत की निगाहें हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।

 

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