Tuesday, January 13

इनोवा पर हूटर और नीली बत्ती लगाकर कसीनो खेलने जा रहे थे युवक, फर्जी ‘प्रधान सचिव’ की धौंस; बहराइच–नेपाल बॉर्डर पर पांच गिरफ्तार

 

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उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में प्रशासनिक पद की आड़ में धौंस जमाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। रुपईडीहा नेपाल बॉर्डर पर पुलिस और एसएसबी ने नीली बत्ती और हूटर लगी इनोवा क्रिस्टा से नेपालगंज की ओर जा रहे पांच युवकों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक युवक ने खुद को उत्तर प्रदेश सरकार का प्रधान सचिव बताकर रौब दिखाने की कोशिश की, लेकिन सख्त पूछताछ में उसकी पोल खुल गई।

 

हूटर बजाते हुए नेपाल की ओर बढ़ रही थी इनोवा

सोमवार दोपहर करीब 12 बजे नेपाल गेट पर नियमित जांच के दौरान पुलिस और एसएसबी के जवानों ने हूटर बजाते हुए नेपालगंज की ओर जा रही इनोवा को रोका। जवानों ने सबसे पहले हूटर बंद कराया और वाहन सवारों से पूछताछ शुरू की। इस दौरान एक युवक ने खुद को प्रधान सचिव बताकर अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन दस्तावेज मांगने पर वह कोई वैध प्रमाण नहीं दिखा सका।

 

कसीनो खेलने का किया कबूलनामा

जब पुलिस ने सख्ती बरती तो आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे नेपालगंज कसीनो खेलने जा रहे थे और इसी कारण उन्होंने नीली बत्ती और हूटर का इस्तेमाल किया था। इसके बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया, जहां तलाशी के दौरान उनके पास से 2 लाख 17 हजार 480 रुपये नकद बरामद किए गए।

 

पांचों आरोपी लखनऊ के निवासी

पकड़े गए आरोपियों की पहचान धर्मेंद्र सिंह पुत्र अंबर सिंह, शुभम वाजपेयी पुत्र यज्ञदत्त वाजपेयी, अनमोल पुत्र स्व. रामचंद्र यादव, सचिन सिंह पुत्र स्व. नत्थी सिंह और स्वपनिल सहाय पुत्र मनीष सहाय के रूप में हुई है। सभी आरोपी लखनऊ के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

 

पुलिस का बयान

रुपईडीहा प्रभारी निरीक्षक रमेश सिंह रावत ने बताया कि नीली बत्ती और हूटर का प्रयोग आम नागरिकों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है। आरोपियों द्वारा सरकारी पद का फर्जी दावा कर नियमों का उल्लंघन किया गया है। सभी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें बहराइच न्यायालय में पेश किया गया है।

 

एसएसबी और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

इस कार्रवाई में थाने के वरिष्ठ उप निरीक्षक दीनानाथ सागर, कॉन्स्टेबल विकास प्रजापति और अभिषेक सिंह के साथ एसएसबी रुपईडीहा बीओपी के उप निरीक्षक सुरेश राम, हेड कॉन्स्टेबल अजय कुमार और महिला कांस्टेबल प्रियंका साव शामिल रहीं।

 

फर्जी पद और विशेषाधिकार का दुरुपयोग कर कानून से ऊपर दिखने की कोशिश करने वालों पर पुलिस की इस सख्त कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि कानून से कोई भी ऊपर नहीं है।

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