
रेवाड़ी (हरियाणा): “म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के…” – यह डायलॉग दंगल फिल्म का सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि हरियाणा की बेटियों की मेहनत और आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुका है। इसी में से एक हैं जिया, जिन्होंने अपने कठिन परिश्रम और परिवार के सहयोग से UPSC नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) एग्जाम में रेवाड़ी जिले में टॉप रैंक हासिल की और सेना में लेफ्टिनेंट बनकर लौटकर गांव का नाम रोशन किया।
ऑटो चलाते हैं पिता, घर संभालती मां
जिया बावल क्षेत्र के गांव सुलखा की रहने वाली हैं। उनके पिता मोहन लाल ऑटो रिक्शा चलाते हैं और मां रेखा देवी गृहिणी हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने जिया और उनके दो भाई-बहनों – पारुल और हिमांशु – को अच्छी पढ़ाई दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई, बड़े सपने
जिया ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सुलखा से 12वीं तक की पढ़ाई की। उनकी सफलता साबित करती है कि मेहनत और आत्मविश्वास ही सबसे बड़ी कुंजी है, किसी हाई-फाई प्राइवेट स्कूल की नहीं।
15 घंटे पढ़ाई, बीमारियों से जंग
12वीं के बाद जिया ने सेना में जाने का लक्ष्य तय किया और NDA की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने रोजाना 15 घंटे पढ़ाई की, गुड़गांव में NDA कोचिंग की और कई महीनों तक बीमारी से भी जूझती रहीं, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी।
सेना में लेफ्टिनेंट बनकर लौटकर गांव में जश्न
UPSC NDA 2024 में जिले में पहला स्थान हासिल करने के बाद जिया जब लेफ्टिनेंट बनकर लौटीं, तो उनके गांव में स्वागत समारोह आयोजित किया गया। माता-पिता और दादा-दादी की आंखों में खुशी के आंसू थे। जिया ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और कड़ी मेहनत को दिया और कहा कि बेटियों को भी बेटों की तरह सम्मान और अवसर देना चाहिए, ताकि वे भी परिवार, गांव और देश का नाम रोशन कर सकें।