Monday, January 12

डेनमार्क की स्पेशल फोर्सेज -40°C में बर्फ के नीचे ट्रेनिंग, ग्रीनलैंड बचाने को अमेरिका से भिड़ने के लिए तैयार

ग्रीनलैंड अब जियोपॉलिटिकल हॉटस्पॉट बन गया है। रूस आर्कटिक में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है, वहीं चीन इलाके के दुर्लभ खनिजों में निवेश कर रहा है। इसी बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस रणनीतिक द्वीप को किसी भी कीमत पर अमेरिका के नियंत्रण में लाने की बात कही है। उन्होंने सैन्य हमले के विकल्प को भी खारिज नहीं किया।

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डेनमार्क की कड़ी प्रतिक्रिया
ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार डेनमार्क ने अमेरिका की किसी भी कोशिश पर कड़ी नाराजगी जताई है। डेनमार्क की स्पेशल फोर्सेज पहले “गोली चलाएंगी और बाद में सवाल पूछेंगी” की नीति पर चलने के लिए तैयार हैं।

बर्फीले इलाकों में स्पेशल ट्रेनिंग
आर्कटिक के घने जंगल में तापमान -40°C तक गिर जाता है और दिन की रोशनी भी बहुत कम होती है। इस कठिन मौसम में डेनमार्क की तीन खास यूनिट – जैगर कॉर्प्स, फ्रॉगमैन और डॉग स्लेड पेट्रोल – युद्ध और बचाव के लिए ट्रेनिंग ले रही हैं।

  • जैगर कॉर्प्स: SAS और यूएस रेंजर्स की तर्ज पर बनी यह यूनिट दुश्मन की लाइनों के पीछे जासूसी और हाई-रिस्क मिशन के लिए प्रशिक्षित है। यहां के सैनिक आर्कटिक तूफानों में पैराशूट से उतरना, अंधेरे में काम करना और हफ्तों तक कम राशन में जीवित रहना जानते हैं।
  • फ्रॉगमैन (नेवी सील्स): ये एलीट समुद्री कमांडो बर्फीले पानी में घुसपैठ, उभयचर हमले और बंधकों को बचाने के ऑपरेशन्स में माहिर हैं।
  • डॉग स्लेड पेट्रोल: मजबूत कुत्तों और विशेष सर्वाइवल गियर से लैस ये दो-सदस्यीय टीमें ग्रीनलैंड के दूरदराज बर्फीले इलाकों में हजारों मील की पेट्रोलिंग करती हैं।

विशेषज्ञों की राय
कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के सैन्य अध्ययन केंद्र के वरिष्ठ शोधकर्ता क्रिस्टियन क्रिस्टेंसन का कहना है कि डेनिश स्पेशल फोर्सेज बहुमुखी और नाटो के उच्च स्तर की सेनाओं के बराबर हैं। ये यूनिट किसी भी कठिन हालात में ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए तैयार हैं।

ग्रीनलैंड की बर्फीली भूमि और कठिन मौसम इसे संभावित युद्ध का मैदान बना देते हैं। डेनमार्क की ये खास फोर्सेज न केवल आर्कटिक में रहना जानती हैं बल्कि दुश्मन की हर चाल को मात देने में सक्षम हैं।

 

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