
सड़क किनारे या बागों में अक्सर देखा गया होगा कि पेड़ों के तनों पर सफेद रंग का लेप या चूना लगाया होता है। बहुत से लोग इसे केवल सजावट समझते हैं, लेकिन इसके पीछे बागवानी और संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। खासकर आम जैसे फलदार पेड़ों के लिए यह सफेद चूना किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है।
कीड़ों और दीमक से बचाव
सफेद चूना आम के पेड़ों पर लगाकर दीमक, चींटियों और तने में छेद करने वाले कीड़ों से सुरक्षा मिलती है। चूने की परत पेड़ के तने पर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है, जिससे कीड़े छाल के अंदर घुसकर पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचा पाते।
धूप और हीट वेव से सुरक्षा
गर्मियों में सूरज की तेज़ किरणें सीधे पेड़ की छाल पर पड़ती हैं। छोटे पेड़ों की छाल संवेदनशील होती है। सफेद रंग सूरज की रोशनी को परावर्तित करता है, जिससे तने का तापमान नियंत्रित रहता है और छाल फटने से बचती है।
फंगल संक्रमण से बचाव
बरसात के मौसम में तने में नमी जमा हो जाती है, जिससे फंगस लगने का खतरा रहता है। चूना नमी को सोखकर फंगल संक्रमण को फैलने से रोकता है और तने को स्वस्थ बनाए रखता है।
पेड़ की उम्र और मजबूती बढ़ती है
सुरक्षित तना नई छाल को विकसित होने का अवसर देता है। चूना लगाने से पेड़ लंबे समय तक फल देने योग्य रहता है और बाहरी रोगों से लड़ने की शक्ति प्राप्त करता है।
गमले के पौधों में चूना लगाना
अगर आपके घर में गमले में आम या बड़े ग्राफ्टेड पेड़ लगे हैं, तो उनके तने पर चूना लगाया जा सकता है। लेकिन छोटे और कोमल पौधों की छाल नाजुक होती है, इसलिए उन पर सीधे चूना न लगाएं। गमले की मिट्टी में थोड़ा चूना मिलाना कैल्शियम की कमी पूरी करता है।
चूना लगाने का सही तरीका और समय
सर्दियों के अंत या गर्मियों की शुरुआत में चूना लगाने का समय सर्वोत्तम होता है। चूने को पानी में घोलकर 24 घंटे के लिए छोड़ दें। इसमें थोड़ा नीला थोथा मिलाने से यह और प्रभावी हो जाता है। ब्रश की मदद से तने को जमीन से 2-3 फीट ऊँचाई तक अच्छे से रंग दें।
सफेद चूना सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि आम के पेड़ों के लिए सुरक्षा, मजबूती और लंबी उम्र का प्रतीक है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट स्रोतों पर आधारित है। एनबीटी इसकी सटीकता की जिम्मेदारी नहीं लेता।