
हर साल 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस (NRI Day) मनाया जाता है। इस खास मौके पर हमने यूके में बसे एनआरआई रश्मि मिश्रा से बात की, जिन्होंने यह बताया कि विदेश में रहकर भी देश और जड़ों से जुड़ाव कभी कम नहीं होता।
एनआरआई दिवस का महत्व
एनआरआई दिवस भारत सरकार और विदेशों में बसे भारतीयों को जोड़ने का अवसर है। विदेश मंत्रालय इस दिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है, जिससे प्रवासी भारतीय अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और सरकार उनकी जरूरतों को समझ सकती है। यह दिन विदेशों में बसे लाखों भारतीयों को याद दिलाता है कि वे भारत के विकास का अभिन्न हिस्सा हैं।
इतिहास से जुड़ी कहानी
9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। उनका यह कदम देश के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। महात्मा गांधी की यह वापसी यह सिखाती है कि विदेशों में प्राप्त अनुभवों का उपयोग मातृभूमि के विकास में कैसे किया जा सकता है। इसी कारण 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
विदेश में जीवन आसान नहीं
शादी के बाद रश्मि मिश्रा को अपने पति के साथ यूके जाना पड़ा। शुरुआती दिनों में वहां का जीवन कठिन रहा। धूप कम और अकेलापन उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करता रहा। ज्यादातर भारतीय महिलाएं विदेश में घर में कैद रह जाती हैं। ऐसे समय में लोगों से संपर्क करना और समाज में जुड़ना बेहद जरूरी होता है।
महिलाओं के लिए समर्थन और भाईचारा
समय के साथ रश्मि ने लोगों से जुड़ना शुरू किया और अपने जैसी महिलाओं का अकेलापन दूर करने के लिए सिस्टर्स सपोर्ट ग्रुप की स्थापना की। यह ग्रुप यूके में बसे भारतीय महिलाओं के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहता है। महिलाएं इसमें अपनी समस्याएं साझा कर मदद ले सकती हैं।
देशप्रेम और समाजसेवा
रश्मि मिश्रा का देशप्रेम विदेश में रहते हुए भी कम नहीं हुआ। उनका ग्रुप भारत के दिवाली समारोह जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करता है और जरूरतमंद बच्चों व महिलाओं की मदद के लिए भी योगदान करता है। रश्मि का यह काम यह दिखाता है कि विदेश में रहते हुए भी भारतीय अपने देश और समाज से जुड़ाव बनाए रख सकते हैं।