
जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर में पंचगव्य योजना के तहत 3.5 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। योजना का उद्देश्य गाय के गोबर, गौमूत्र और दूध से कैंसर जैसी बीमारियों पर रिसर्च करना था, लेकिन अधिकारियों ने इसे निजी ऐश-आराम, नई गाड़ियों और हवाई यात्राओं में उड़ाकर दुरुपयोग किया।
योजना की शुरुआत से ही घोटाले
2011 में शुरू की गई इस योजना के तहत नानाजी देशमुख विश्वविद्यालय को करोड़ों रुपये दिए गए थे। योजना में डॉ. यशपाल साहनी, डॉ. सचिन कुमार जैन, गिरिराज सिंह सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे। शुरुआत से ही योजना में अनियमितताएं सामने आने लगीं और बाद में इसे 2018 में बंद कर दिया गया।
जांच में खुलासा
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के आदेश पर डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी और जिला कोषालय अधिकारी विनायकी लकरा ने जांच की। जांच में पाया गया कि:
लगभग 1.92 करोड़ रुपये गोबर, गौमूत्र, कच्चे पदार्थ और मशीनों की खरीद में खर्च किए गए, जबकि बाजार में कीमत महज 15-20 लाख रुपये थी।
अधिकारियों ने रिसर्च के नाम पर 20 से अधिक शहरों की हवाई यात्राएं की।
करीब 7.5 लाख रुपये नई कार और उसके रख-रखाव में खर्च हुए।
अन्य खर्चों में 15 लाख रुपये टेबल और इलेक्ट्रॉनिक आइटम शामिल थे।
किसानों को ट्रेनिंग के नाम पर भी ठगी
जांच में यह भी सामने आया कि 2016 से 2020 तक कई किसानों को पंचगव्य योजना के तहत प्रशिक्षण देने का दावा किया गया, लेकिन वास्तविक लिस्ट में तारीखें और रिकॉर्ड नहीं थे।
विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी भी संदिग्ध
जांच टीम ने यह भी पाया कि योजना में शामिल कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है। डिप्टी कलेक्टर और विनायकी लकरा की रिपोर्ट कलेक्टर के माध्यम से कमिश्नर तक भेज दी गई है।
कुलगुरु का दावा
नानाजी देशमुख पशु विज्ञान महाविद्यालय के कुलगुरु मनदीप शर्मा ने कहा कि योजना में किए गए सभी कार्यों की तकनीकी और वित्तीय रिपोर्ट पहले ही ऑडिटेड थीं। उनके अनुसार उस समय किसी भी अनियमितता का पता नहीं चला था।